उत्तराखंड
इस साल सामान्य से कम बरसेगा मानसून, मौसम विभाग ने अल नीनो को लेकर जताई चिंता
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने इस वर्ष के मानसून के लिए चिंताजनक पूर्वानुमान जारी किया है। विभाग के अनुसार, जून से सितंबर के दौरान होने वाली मानसूनी बारिश इस बार सामान्य से 8 फीसदी कम रहने की आशंका है। मौसम विभाग के महानिदेशक डॉ. एम. महापात्र ने बताया कि इस अवधि में कुल 92 फीसदी बारिश होने का अनुमान है, जो कि औसत बारिश के मुकाबले काफी कम है। पश्चिम एशिया के संघर्षों के बीच अर्थव्यवस्था पर पड़ रहे असर के साथ-साथ कम बारिश की यह खबर कृषि और जल प्रबंधन के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती है।
अल नीनो का साया और बारिश के आंकड़े
मौसम विभाग ने मानसून के दौरान ‘अल नीनो’ के प्रभाव की आशंका जताई है, जिससे स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। आंकड़ों के अनुसार, आमतौर पर जून से सितंबर के बीच भारत में औसत 870 मिलीमीटर बारिश होती है, लेकिन इस बार यह आंकड़ा घटकर केवल 800 मिलीमीटर के आसपास रह सकता है। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि इस पूर्वानुमान में 5 फीसदी की मॉडल त्रुटि (कम या ज्यादा होने की संभावना) हो सकती है।
कितनी सटीक होगी भविष्यवाणी? संभावनाओं का गणित
मौसम विभाग ने अलग-अलग परिस्थितियों के आधार पर बारिश की संभावनाओं को प्रतिशत में साझा किया है:
- सूखा या बेहद कम बारिश (90% से कम): इसकी संभावना 35 फीसदी जताई गई है।
- सामान्य से कम बारिश (90-95%): इसकी संभावना 31 फीसदी है।
- सामान्य बारिश (96-104%): इसकी संभावना केवल 27 फीसदी है।
- सामान्य से अधिक बारिश (105-110%): इसकी उम्मीद महज 6 फीसदी है।
अर्थव्यवस्था और सामान्य जनजीवन पर असर
कम बारिश का सीधा असर खेती और देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। विभाग ने बताया कि यह पूर्वानुमान 1971-2020 के आंकड़ों के आधार पर तैयार किया गया है। यदि मानसून वास्तव में कमजोर रहता है, तो आने वाले महीनों में पानी की किल्लत और फसलों की पैदावार पर इसके विपरीत प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।





