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उत्तराखंड

उत्तराखंड PWD का मास्टर प्लान: 2031 तक कच्ची सड़कें होंगी पक्की

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने लोक निर्माण विभाग की ‘मास्टर प्लान-2026-2031’ पुस्तिका का विमोचन किया है। इस पांच वर्षीय कार्ययोजना का मुख्य उद्देश्य राज्य के बुनियादी ढांचे को सशक्त और सुरक्षित बनाना है। सीएम ने कहा कि यह रोडमैप ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प को पूरा करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इस योजना के तहत न केवल नई सड़कों का निर्माण होगा, बल्कि आधुनिक तकनीक और सड़क सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।

कच्ची सड़कों और पुलों का होगा कायाकल्प

मास्टर प्लान का सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य 2031 तक प्रदेश की हर कच्ची सड़क को ऑल वेदर मानकों के अनुसार अपग्रेड करना है। विभाग ने ‘पांच वर्षीय पेविंग नियम’ शामिल किया है, जिसके तहत नई बनी सड़कों को तय समय के भीतर पक्का करना अनिवार्य होगा। इसके अलावा, 1,200 ‘बी’ श्रेणी के पुराने पुलों को आधुनिक ‘ए’ श्रेणी में बदला जाएगा और पर्वतीय क्षेत्रों में जोखिम भरी मैनुअल ट्रॉलियों को स्थायी पुलों से बदला जाएगा।

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सड़क सुरक्षा और आधुनिक तकनीक पर जोर

सड़क सुरक्षा की दृष्टि से मास्टर प्लान में ब्लैक-स्पॉट का उपचार, आधुनिक क्रैश बैरियर और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों के स्थायी उपचार को प्राथमिकता दी गई है। देहरादून के लिए रिस्पना और बिंदाल नदियों पर एलिवेटेड कॉरिडोर और प्रमुख शहरों में बाईपास निर्माण की योजना है। खास बात यह है कि अब सड़क निर्माण में प्लास्टिक कचरे का उपयोग करने जैसे नवाचारों को बढ़ावा दिया जाएगा।

100 से अधिक प्रोजेक्ट्स और भविष्य का विजन

सचिव लोक निर्माण विभाग डॉ. पंकज कुमार पांडे के अनुसार, इस पुस्तिका में 100 से अधिक महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स को शामिल किया गया है। इसमें रोड कनेक्टिविटी, ब्रिज डेवलपमेंट, वित्तीय प्रबंधन और टेक्नोलॉजी जैसे विभिन्न पहलुओं पर विभाग का विजन स्पष्ट किया गया है। यह पहली बार है जब लोनिवि ने जिला स्तर के बजाय सीधे राज्य स्तर पर इतना बड़ा मास्टर प्लान तैयार किया है।

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उत्तराखंड में 5735 किमी सड़कें आज भी कच्ची

उत्तराखंड में सड़क नेटवर्क का विस्तार तेजी से हुआ है और साल 2025 तक यह बढ़कर 42,157 किमी तक पहुँच गया है, लेकिन जमीनी हकीकत आज भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में अभी भी 5,735 किलोमीटर सड़कें कच्ची हैं, जिनमें से 5,501 किमी से अधिक सड़कें ग्रामीण क्षेत्रों की हैं। आंकड़ों के मुताबिक, पौड़ी गढ़वाल जिला 1,706.89 किमी कच्ची सड़कों के साथ सूची में सबसे ऊपर है, जबकि ऊधम सिंह नगर में एक भी सड़क कच्ची नहीं है। लोक निर्माण विभाग ने अब इन सभी मार्गों को अगले पाँच वर्षों में एडीबी और नाबार्ड के सहयोग से पक्का करने का लक्ष्य रखा है, ताकि लाखों लोगों को ऊबड़-खाबड़ रास्तों से राहत मिल सके।

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