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उत्तराखंड

उत्तराखंड में शहतूत की नई किस्में: रेशम उत्पादन बढ़ाने का बड़ा फैसला

देहरादून से प्राप्त जानकारी के अनुसार, उत्तराखंड का रेशम विभाग लगभग 25 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद शहतूत की प्रजातियों में बदलाव करने जा रहा है। विभाग की इस योजना का मुख्य उद्देश्य शहतूत की ऐसी नई किस्में लगाना है जिनसे पत्तियों का उत्पादन अधिक हो सके, क्योंकि रेशम के कीड़े इन्हीं पत्तियों को खाकर कोकून तैयार करते हैं। रेशम विभाग के निदेशक प्रदीप कुमार के अनुसार, नई प्रजातियों के चयन से पत्तियों की पैदावार मौजूदा किस्मों की तुलना में करीब डेढ़ गुना तक बढ़ जाएगी, जिसका सीधा और सकारात्मक असर राज्य के कुल रेशम उत्पादन पर पड़ेगा।

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चरणबद्ध तरीके से होगा नई प्रजातियों का रोपण

राज्य में रेशम विभाग के कुल 72 फार्म मौजूद हैं, जहाँ वर्तमान में पुरानी प्रजातियों के शहतूत लगे हुए हैं। विभाग ने इन सभी फार्मों पर नई प्रजाति लगाने के लिए एक व्यवस्थित और चरणबद्ध योजना बनाई है, जिसके तहत पहले चयनित फार्मों के एक हिस्से में बदलाव किया जाएगा और अगले साल शेष आधे हिस्से में नई प्रजातियां लगाई जाएंगी। इस प्रक्रिया के माध्यम से विभाग यह सुनिश्चित करना चाहता है कि उत्पादन में बिना किसी बड़े व्यवधान के आधुनिक किस्मों को अपनाया जा सके।

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किसानों को भी मिलेगा नई तकनीक का लाभ

रेशम विभाग केवल अपने सरकारी फार्मों तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इस नई तकनीक और उन्नत प्रजाति का लाभ स्थानीय किसानों तक पहुँचाने की भी तैयारी कर रहा है। विभाग की योजना है कि इन नई और बेहतर उत्पादकता वाली शहतूत की प्रजातियों को नर्सरी में तैयार किया जाए और फिर उन्हें किसानों को उपलब्ध कराया जाए। इससे न केवल विभाग के उत्पादन में वृद्धि होगी, बल्कि रेशम कीट पालन से जुड़े किसानों की आय और कोकून की गुणवत्ता में भी सुधार देखने को मिलेगा।

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