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उत्तराखंड

बदरीनाथ मार्ग पर उत्तराखंडी थाली: वन विभाग देगा महिला समूहों को ढाबे

बदरीनाथ धाम की यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए अब आध्यात्मिक दर्शन के साथ-साथ उत्तराखंड के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद लेना भी आसान होगा। वन विभाग ने एक नई पहल करते हुए यात्रा मार्ग पर स्थानीय महिला स्वयं सहायता समूहों के सहयोग से विशेष ढाबे और होटल संचालित करने की योजना तैयार की है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य लाखों की संख्या में आने वाले यात्रियों को देवभूमि की खाद्य संस्कृति से परिचित कराना है, जो अब तक अधिकांश होटलों में केवल सामान्य भोजन उपलब्ध होने के कारण स्थानीय स्वाद से वंचित रह जाते थे। वन विभाग की इस योजना से श्रद्धालुओं को उत्तराखंड की संस्कृति और स्वाद का अनूठा संगम देखने को मिलेगा।

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पारंपरिक व्यंजनों की थाली और महिला सशक्तिकरण

इस विशेष पहल के तहत यात्रा मार्ग पर यात्रियों को मंडुवे की रोटी, झंगोरे की खीर, काफुली, फाणु, चैंसू और स्थानीय दालों जैसे लजीज पारंपरिक व्यंजन परोसे जाएंगे। इन ढाबों का निर्माण स्वयं वन विभाग द्वारा किया जाएगा, जबकि इनका पूर्ण संचालन स्थानीय महिला समूहों के माध्यम से होगा। इससे न केवल स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार के नए द्वार भी खुलेंगे, जिससे वे आर्थिक रूप से अधिक सशक्त बन सकेंगी।

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विशेष प्रशिक्षण और ढाबों का स्थान

वन संरक्षक (गढ़वाल) आकाश वर्मा के अनुसार, यात्रा मार्ग पर बेडू बगड़ (बिरही) और गैर पुल के पास इन विशेष ढाबों को विकसित किया जाएगा। इन समूहों से जुड़ी महिलाओं को केवल खाना बनाने तक ही सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि उन्हें पारंपरिक व्यंजनों के निर्माण के साथ-साथ स्वच्छता, बेहतर आतिथ्य सत्कार और कुशल प्रबंधन का विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य यात्रियों को एक सुरक्षित, स्वच्छ और उच्च गुणवत्ता वाला पहाड़ी भोजन अनुभव प्रदान करना है।

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