उत्तराखंड
उत्तराखंड के शहरों के कचरे के पहाड़ों को साफ करने के लिए शराब पर लग सकता है नया सेस
जब कोई बीमार होता है तो कहा जाता है, “कुछ दवा दारू कर लो“ शायद इस मुहावरे पर राज्य के शहरी विकास विभाग ने गौर फरमाया है। जो शराब उत्तराखंड में अब तक गौसेवा, खेल और महिला विकास में अपना योगदान दे रही है उसके कांधे पर अब राज्य के शहरों को साफ सुथरा बनाने की जिम्मेदारी भी आ सकती है। दरअसल शहरी विकास विभाग ने राज्य के 108 नगर निकायों मे ठोस कचरे के ऊंचे होते पहाड़ों का सल्यूशन शराब में ढूंढा है।
शहरी विकास विभाग ने एक ऐसा मसौदा तैयार किया है जिस पर मुख्य सचिव और धामी कैबिनेट की ओके रिपोर्ट लग जाए तो राज्य के नगरों का कायाकल्प हो सकता है। मसौदे का मजमून ये है कि राज्य में बिकने वाली हर बोतल पर एक रूपया उपकर यानि “सेस” लगा दिया जाए और इस उपकर से शहरों के डंपिग जोन में मौजूद कचरे के पहाड़ों का निस्तारण किया जाए ताकि शहर साफ सुथरे दिखाई दें और कचरे का डंपिग बदबू मुक्त। स्थानीय निवासी भी चैन से लंबी सांस ले सकें।
गौरतलब है कि राज्य नगर निकायों मे हर दिन मोटा मोटी 2100 मैट्रिक टन ठोस कचरा इकट्ठा होता है। जिसका निस्तारण फौरन नहीं होता बल्कि कचरे के लिए बनाए गए 60 से ज्यादा डंपिग जोन में उड़ेल दिया जाता है। जहां मौजूद कचरा आसपास के लोंगो के लिए एक बड़ी मुसीबत तो होता ही है शहर के लिए दाग भी बन जाता है और उसे साफ करना एक चुनौती भी।
इसी से निपटने के लिए शहरी विकास विभाग ने ये नया प्लान बनाया है जिसमे शराब की मदद ली जानी है। माना जा रहा है कि शहरी विकास विभाग का ये नया मसौदा मुख्य सचिव ने फायनल किया और धामी कैबिनेट ने ओके, तो राज्य के नगर निकायों में “कचरे के मौजूदा बदबूदार पहाड़ ” कल की बात हो जाएंगे।




