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उत्तराखंड

उत्तराखंड में ओलावृष्टि का कहर: 23 हेक्टेयर फसल बर्बाद

उत्तराखंड में पिछले दिनों हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। विशेष रूप से टिहरी और ऊधमसिंह नगर जिलों में रबी की फसल (मुख्यतः गेहूं) को काफी नुकसान पहुँचा है। राजस्व और कृषि विभाग ने मिलकर नुकसान का सर्वे पूरा कर लिया है, जिसमें लगभग 23 हेक्टेयर क्षेत्र में फसलों की क्षति की पुष्टि हुई है। अब प्रशासन इस रिपोर्ट के आधार पर प्रभावित किसानों को राहत राशि प्रदान करने की तैयारी कर रहा है, जबकि उद्यान विभाग अभी अपने स्तर पर नुकसान का आकलन कर रहा है।

किन जिलों में हुआ कितना नुकसान?

सर्वे के अनुसार, दो जिलों में फसल को सबसे अधिक चोट पहुँची है। ऊधमसिंह नगर के गदरपुर क्षेत्र में 15.07 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फसल खराब हुई है, जिसमें से 10.95 हेक्टेयर में नुकसान 33 प्रतिशत से भी ज्यादा है। वहीं, टिहरी जिले के जौनपुर ब्लॉक में 7.40 हेक्टेयर में फसलों को नुकसान हुआ है, जिसमें 5.06 हेक्टेयर क्षेत्र में 33 प्रतिशत से अधिक की क्षति दर्ज की गई है।

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मुआवजे के नियम और मिलने वाली राशि

सरकारी नियमों के अनुसार, आपदा प्रबंधन विभाग के माध्यम से मुआवजा केवल उन्हीं मामलों में दिया जाता है जहाँ फसल का नुकसान 33 प्रतिशत से अधिक होता है। कृषि निदेशक के अनुसार, सिंचित क्षेत्र में फसल बर्बादी पर 17 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से मुआवजा देने का प्रावधान है। कृषि और राजस्व विभाग की संयुक्त रिपोर्ट जिला प्रशासन के जरिए आपदा प्रबंधन विभाग को भेजी जाती है, जहाँ से मानकों के आधार पर धनराशि जारी की जाती है।

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उद्यान विभाग का सर्वे अभी जारी

जहाँ कृषि विभाग ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर ली है, वहीं उद्यान विभाग के अंतर्गत आने वाली फसलों के नुकसान का आकलन अभी चल रहा है। उद्यान विभाग के उप निदेशक ने बताया कि सर्वे का काम गति पर है और जल्द ही इसकी रिपोर्ट भी प्रशासन को सौंप दी जाएगी, ताकि संबंधित बागवानों को भी राहत मिल सके।

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