उत्तराखंड
उत्तराखंड के विकास को मिलेगी नई रफ्तार: वन संपदा से जुड़ेगा स्वरोजगार
हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने लोकसभा में उत्तराखंड की वन संपदा को स्थानीय आजीविका और स्वरोजगार से जोड़ने की जोरदार वकालत की है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों के लिए वनों को ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार बनाना समय की मांग है। इसी बीच, क्षेत्र के लिए एक बड़ी खुशखबरी भी सामने आई है—केंद्र सरकार ने ऋषिकेश बाईपास को 4-लेन में विकसित करने के लिए 1105.79 करोड़ रुपये की ऐतिहासिक मंजूरी दे दी है। इस फैसले से ऋषिकेश और आसपास के क्षेत्रों में यातायात सुगम होगा और क्षेत्रीय विकास को एक नई दिशा मिलेगी।
ऋषिकेश बाईपास 4-लेन: कनेक्टिविटी में होगा बड़ा सुधार
सांसद त्रिवेंद्र ने केंद्र सरकार द्वारा ऋषिकेश बाईपास के चौड़ीकरण के लिए बजट स्वीकृत करने को एक दूरदर्शी निर्णय बताया है। इसके साथ ही उन्होंने सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से मिलकर छिद्दरवाला और रेशम माजरी में प्रस्तावित फ्लाईओवर व अंडरपास के मुद्दे पर स्थानीय जनता और व्यापारियों की चिंताओं को भी प्रमुखता से रखा। सरकार की ओर से इन मांगों पर सकारात्मक पहल हुई है, जिसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और मंत्री गडकरी का आभार जताया है।
वन संपदा और अर्थव्यवस्था: आंकड़ों की जुबानी
संसद में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में पर्यावरण एवं वन मंत्री भूपेंद्र यादव ने बताया कि वर्ष 2024-25 में वानिकी और वन उत्पादों का सकल मूल्य संवर्धन (GVA) में योगदान 1.4 प्रतिशत दर्ज किया गया है। राष्ट्रीय वन नीति 1988 और वन अधिकार अधिनियम 2006 के माध्यम से ग्रामीण और जनजातीय समुदायों की जरूरतों और अधिकारों को मजबूत किया जा रहा है। सांसद रावत का मानना है कि यदि वन आधारित गतिविधियों को स्वरोजगार से जोड़ा जाए, तो उत्तराखंड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव आ सकता है।





