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उत्तराखंड

हॉर्मुज संकट से दुनिया में हाहाकार: रोजाना 80-100 करोड़ बैरल तेल की आपूर्ति ठप

ईरान युद्ध के चलते वैश्विक ऊर्जा बाजार एक ऐतिहासिक संकट के दौर में पहुंच गया है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से दुनिया की करीब 8 से 10 मिलियन बैरल तेल की दैनिक आपूर्ति और 20% एलएनजी (LNG) सप्लाई पूरी तरह रुक गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति 1973 के अरब तेल प्रतिबंध के बाद अब तक का सबसे गंभीर संकट है। इसके कारण जेट फ्यूल, डीजल और पेट्रोल की कीमतों में भारी उछाल आने की संभावना है, जिसका असर एशिया से लेकर यूरोप तक देखा जा रहा है।

तेल की कीमतों में रिकॉर्ड उछाल

तनाव बढ़ने के कारण कच्चे तेल की कीमतें पिछले तीन साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। अमेरिकी कच्चा तेल 99.64 डॉलर और ब्रेंट क्रूड 112.57 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि यदि स्थिति नहीं सुधरी तो जेट फ्यूल की कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती हैं, जिससे हवाई यात्रा और माल ढुलाई काफी महंगी हो जाएगी।

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एलएनजी (LNG) सप्लाई पर दबाव

तेल के साथ-साथ प्राकृतिक गैस की आपूर्ति पर भी बुरा असर पड़ा है। एलएनजी की 20% सप्लाई बाधित होने से बिजली संयंत्रों और उद्योगों के लिए संकट पैदा हो गया है। अमेरिका से एशिया तक गैस पहुंचाने में लगभग 28 दिन का समय लगता है, जिससे तत्काल राहत मिलना मुश्किल नजर आ रहा है। थाईलैंड जैसे देशों में तो अभी से पेट्रोल की राशनिंग शुरू हो गई है।

खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्था पर खतरा

विशेषज्ञों के अनुसार, यह संकट इराक, कतर और यूएई जैसे खाड़ी देशों के आर्थिक मॉडल को पूरी तरह तोड़ सकता है। इस तनाव की वजह से इन देशों की जीडीपी (GDP) में 30% तक की गिरावट आने की आशंका जताई गई है। कई देशों ने अपना तेल भंडार सुरक्षित करना शुरू कर दिया है, जिससे वैश्विक बाजार में तेल की कमी और भी ज्यादा गहरा सकती है।

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ईरान का ‘डी-फैक्टो’ नियंत्रण

स्वतंत्र विश्लेषकों का कहना है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर फिलहाल ईरान का प्रभावी नियंत्रण है, जिसे उन्होंने वैश्विक अर्थव्यवस्था को ‘बंधक’ बनाने जैसा कदम बताया है। अमेरिकी अधिकारियों ने भी चेतावनी दी है कि ओमान की खाड़ी तक समुद्री मार्गों की सुरक्षा करना अब एक बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य बन गया है।

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