उत्तराखंड
उत्तराखंड बार काउंसिल चुनाव: 97 अधिवक्ताओं के मताधिकार की उम्मीदों को झटका, मतदाता सूची में नाम नहीं
उत्तराखंड बार काउंसिल चुनाव में अपने मताधिकार का प्रयोग करने की रखने वाले 97 अधिवक्ताओं को बड़ा झटका लगा है। दरअसल, बार काउंसिल चुनाव को लेकर जस्टिस राजीव शर्मा की अध्यक्षता में जस्टिस कुलदीप सिंह और जस्टिस UC ध्यानी की हाई पावर्ड चुनाव कमेटी ने बैठक करी, जिसमें कमेटी ने स्पष्ट किया कि एक बार चुनाव प्रक्रिया शुरु हो जाने के बाद मतदाता सूची में किसी भी प्रकार का बदलाव करना या नए नामों को जोड़ना असंभव है। बता दें कि समिति के समक्ष उन 97 अधिवक्ताओं द्वारा आवेदित सूची को प्रस्तुत किया गया, जिन्होंने अंतिम मतदाता सूची में नाम शामिल करने के लिए घोषणा पत्र जमा किए थे। वहीं हाई पार्वड चुनाव समिति ने पाया कि इन 97 आवेदकों में से मात्र 11 आवेदकों ने अपने आवेदन पर तिथि अंकित की थी, जबकि शेष 76 आवेदकों के फॉर्म पर तारीख नहीं थी तो वहीं 10 आवेदन संबंधित बार एसोसिएशन द्वारा अनुशंसित नहीं पाए गए।
उक्त बैठक में समिति ने कुंवर विक्रमादित्य शाह के आवेदन पर भी चर्चा की, समिति ने स्पष्ट किया कि उनके आवेदन का निस्तारण 5 जनवरी 2026 को हुई 12वीं बैठक में पहले ही किया जा चुका है और इसकी सूचना उन्हें ईमेल के माध्यम से भेज दी गई है। वहीं समिति ने निर्वाचन नियमों की कठोरता को देखते हुए शेष आवेदकों को राहत देने से साफ इनकार कर दिया। चूंकि जब समिति ने दस्तावेजों का अवलोकन किया तो उन्हें दस्तावोजों में गंभीर खामियां देखने को मिली। उदाहरण के तौर पर, संगीता नामक एक आवेदक ने फॉर्म पर 25 दिसंबर 2025 की तिथि अंकित जरुर की थी, लेकिन उनके फॉर्म में एलएलबी उत्तीर्ण करने की जानकारी वाला कॉलम पूरी तरह खाली पाया गया। इसके अतिरिक्त, पांच अन्य अधिवक्ताओं के केवल ‘सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस’ भेजे गए थे, जबकि उनके घोषणा पत्र रिकॉर्ड में नहीं थे।
मतदाता सूची में नहीं होंगे नाम शामिल
हाई पावर चुनाव समिति ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अंतिम मतदातास सूची बीते दो जनवरी को आधिकारिक वेबसाइट पर पहले ही प्रकाशित की जा चुकी है। वहीं 3 जनवरी से शुरु हुई नामांकन प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है, ऐसे में अब सूची में किसी भी नए नाम को शामिल करना निर्वाचन नियमों के विरुद्ध है। समिति ने अपने इस निर्णय के पीछे उद्देश्य सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का सम्मान करना स्पष्ट किया, समिति ने बताया कि ‘एम. वर्धन बनाम भारत संघ’ मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि सभी राज्य विधिज्ञ परिषदों और चुनाव समितियों को निर्धारित समय-सारिणी का सख्ती से पालन करना होगा।
97 अधिवक्ताओं को लगा बड़ा झटका
वहीं तय समय-सारिणी के अनुसार, 19 दिसंबर 2025 को अनंतिम मतदाता सूची जारी की गई थी और आपत्तियां दर्ज करने के लिए 26 दिसंबर 2025 तक का समय दिया गया था, सभी चरण पूरे के बाद ही 2 जनवरी 2026 को फाइनल रोव तैयार किया गया था। यही कारण है चुनाव की अधिसूचना, अनंतिम सूची और अंतिम सूची के सभी चरण पूरे हो जाने पर ही समिति ने सर्वसम्मति से नए आवेदकों के नाम मतदाता सूची में शामिल न करने का फैसला लिया।
बहरहाल, समिति द्वारा लिया गया यह फैसला उन सभी 97 अधिवक्ताओं के लिए जोरदार झटका है जो इस बार मतदान की उम्मीद लगाए बैठे थे। उत्तराखंड बार काउंसिल चुनाव के 23 पदों के लिए 104 अधिवक्ताओं ने नामांकन दर्ज कराया है, हालांकि, नामांकन पत्रों की जांच व नाम वापिसी का समय अभी बाकी है। आपको बता दें कि इस बार उत्तराखंड बार काउंसिल चुनाव में तकरीबन 14850 अधिवक्ताओं को अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।





