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उत्तराखंड

पौड़ी में जंगलों की आग पर वन विभाग और सामाजिक कार्यकर्ताओं के बीच खींचतान

पौड़ी गढ़वाल में जंगलों की आग को लेकर आंकड़ों को लेकर जंगलों की आग को लेकर वन विभाग और सामाजिक कार्यकर्ताओं के बीच तीखा विवाद छिड़ गया है। वन विभाग के अनुसार फायर सीजन शुरू होने के बाद अब तक जनपद में सिर्फ 26 वनाग्नि की घटनाएं हुई हैं, जिनमें गढ़वाल वन प्रभाग में 7, सिविल एवं सोयम पौड़ी में 17 और लैंसडौन वन प्रभाग में केवल 2 मामले दर्ज किए गए हैं।

वहीं, सामाजिक कार्यकर्ता और ऑनलाइन फायर अलर्ट वेबसाइट के अनुसार 1 से 28 अप्रैल के बीच गढ़वाल में 80, लैंसडौन में 33 और कालागढ़ प्रभाग में 11 वनाग्नि की घटनाएं दर्ज हुई हैं। कार्यकर्ता जगमोहन डांगी व पौड़ी बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक नमन चंदोला ने आरोप लगाया कि वन विभाग असली संख्या छुपा रहा है और वनाग्नि सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं है। वहीं, वन विभाग ने दावा किया कि वह क्रू स्टेशनों के माध्यम से निगरानी कर रहा है, जंगलों की आग तत्परता से बुझाई जा रही है और कोई घटना छुपाई नहीं जा रही।

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जिला अस्पताल की नेत्ररोग विशेषज्ञ डॉ. गीतांजलि पाल ने बताया कि जंगल की आग की वजह से आंखों में जलन‑सूखापन वाले 4‑5 मरीज प्रतिदिन आ रहे हैं, जबकि फिजिशियन डॉ. आनंद खंकरियाल ने कहा कि सांस संबंधी रोगों वाले 10‑15 नए मरीज रोज ओपीडी में दिख रहे हैं, जो दिखाता है कि वनाग्नि जनस्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल रही है।

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