उत्तराखंड
रुपये की गिरावट से संकट से 2030 तक 5 ट्रिलियन इकोनॉमी बनी मुश्किल, SBI रिसर्च की चेतावनी
ईरान संकट जैसे वैश्विक कारणों और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता की वजह से डॉलर के मुकाबले रुपया गिरकर 95 के स्तर के नीचे आ गया है, जिसका सीधा असर भारत के आर्थिक लक्ष्यों पर पड़ रहा है। एसबीआई रिसर्च की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, यदि रुपया इसी तरह 95 के स्तर पर बना रहता है, तो भारतीय अर्थव्यवस्था का वर्तमान आकार घटकर लगभग 4.04 लाख करोड़ डॉलर रह जाएगा।
ऐसी स्थिति में भारत को 5 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का प्रधानमंत्री का सपना साल 2029-30 से पहले पूरा होना मुश्किल नजर आ रहा है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि हाल के समय में बाहरी दबाव और बाजार में अनियंत्रित सट्टेबाजी ने रुपये की मजबूती को काफी नुकसान पहुँचाया है, जिससे बचने के लिए अब आयात के विकल्प खोजने और निर्यात क्षमता को वैश्विक स्तर पर मजबूत करने जैसे ठोस कदम उठाने होंगे।
जीडीपी वृद्धि दर के अनुमान और भुगतान संतुलन की चुनौतियां
आर्थिक विकास की रफ्तार को लेकर रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.2 प्रतिशत के आसपास रह सकती है, जबकि पूरे वित्त वर्ष के लिए इसके 7.5 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों का 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जाना और परिवहन व बीमा लागत में भारी वृद्धि होना देश के ‘भुगतान संतुलन’ के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
इस वित्तीय समस्या से निपटने के लिए नीतिगत स्तर पर एक व्यापक पैकेज की आवश्यकता जताई गई है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए यह रिपोर्ट तब सामने आई है जब सरकार ने भी जनता से विदेशी मुद्रा बचाने के लिए ईंधन का समझदारी से उपयोग करने, सोने की खरीद कम करने और गैर-जरूरी विदेश यात्राओं को टालने की अपील की है।




