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उत्तराखंड

मराठी नहीं आती तो ऑटो‑टैक्सी नहीं चला पाएंगे: महाराष्ट्र सरकार का बड़ा निर्णय 1 मई से लागू

महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में चलने वाली सभी टैक्सियों और ऑटो-रिक्शा के चालकों के लिए मराठी भाषा का ज्ञान अनिवार्य करने का निर्णय लिया है। कैबिनेट मंत्री प्रताप सरनाइक के अनुसार, यह नियम 1 मई (महाराष्ट्र दिवस) से प्रभावी रूप से लागू कर दिया जाएगा। सरकार का उद्देश्य स्थानीय भाषा को बढ़ावा देना और यात्रियों के साथ बेहतर संवाद सुनिश्चित करना है। जो चालक इस नियम का पालन नहीं करेंगे या जिन्हें मराठी का बुनियादी ज्ञान नहीं होगा, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए लाइसेंस रद्द किए जा सकते हैं।

लाइसेंस रद्द करने और जांच की सख्त चेतावनी

सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन ड्राइवरों को मराठी भाषा पढ़ना और लिखना नहीं आता होगा, उनके परमिट और लाइसेंस खत्म कर दिए जाएंगे। इसकी जांच के लिए मोटर परिवहन विभाग के 59 क्षेत्रीय और उप-क्षेत्रीय कार्यालयों के माध्यम से एक राज्यव्यापी निरीक्षण अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान के तहत सड़कों पर उतरकर चालकों की भाषा दक्षता की जांच की जाएगी।

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लापरवाह अधिकारियों पर भी होगी कार्रवाई

मंत्री सरनाइक ने चेतावनी दी है कि कार्रवाई केवल ड्राइवरों तक सीमित नहीं रहेगी। परिवहन विभाग के उन अधिकारियों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी, जो नियमों की अनदेखी करके गलत तरीके से लाइसेंस जारी करने के दोषी पाए जाएंगे। सरकार का कहना है कि स्थानीय भाषा का नियम पहले से अस्तित्व में है, लेकिन बड़े पैमाने पर हो रहे उल्लंघन को देखते हुए अब इसे सख्ती से लागू करने का फैसला लिया गया है।

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1 मई से लागू होगा नया नियम

इस फैसले को लागू करने के लिए 1 मई यानी महाराष्ट्र दिवस की तारीख चुनी गई है। सरकार को इस संबंध में कई शिकायतें मिली थीं कि कई चालक स्थानीय भाषा न जानने के कारण यात्रियों के साथ सही व्यवहार नहीं कर पा रहे हैं, जिसके बाद यह सख्त कदम उठाया गया है।

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