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उत्तराखंड

उत्तराखंड में गर्भवती महिलाओं की अनिवार्य ट्रैकिंग: मातृ मृत्यु दर घटाने के लिए सरकार का बड़ा कदम

उत्तराखंड सरकार ने राज्य में मातृ मृत्यु दर को कम करने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। स्वास्थ्य सचिव डॉ. राजेश कुमार ने निर्देश दिए हैं कि अब राज्य की प्रत्येक गर्भवती महिला की अनिवार्य रूप से ट्रैकिंग की जाएगी। इस पहल का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर महिला को समय पर स्वास्थ्य जाँच मिले और उनका प्रसव सुरक्षित तरीके से अस्पतालों में ही हो। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर महिलाओं की जाँच करेंगी और हाई-रिस्क वाली गर्भवती महिलाओं पर विशेष निगरानी रखी जाएगी।

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हाई-रिस्क और एनीमिया पीड़ितों पर विशेष ध्यान

सरकार उन गर्भवती महिलाओं पर ज्यादा ध्यान दे रही है जो एनीमिया (खून की कमी) से जूझ रही हैं या जो ‘हाई-रिस्क’ श्रेणी में आती हैं। ऐसी महिलाओं को प्रसव से पहले अस्पताल पहुँचाने के लिए 108 एम्बुलेंस के साथ-साथ सरकारी वाहनों का भी उपयोग किया जाएगा। लक्ष्य यह है कि राज्य में 100% संस्थागत प्रसव सुनिश्चित हो सके, ताकि प्रसव के दौरान होने वाली मौतों को रोका जा सके।

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टीबी उन्मूलन के लिए स्क्रीनिंग अभियान

स्वास्थ्य विभाग टीबी को जड़ से खत्म करने के लिए भी एक विशेष 100 दिवसीय अभियान चला रहा है। इसके तहत अस्पतालों की ओपीडी में आने वाले कम से कम 10 प्रतिशत मरीजों की अनिवार्य रूप से टीबी जाँच की जाएगी। स्वास्थ्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इस अभियान के माध्यम से ज्यादा से ज्यादा लोगों की स्क्रीनिंग की जाए ताकि बीमारी का समय पर पता चल सके और इलाज शुरू हो सके।

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