उत्तराखंड
उत्तराखंड में साइबर क्राइम पर लगेगी लगाम: देहरादून के साइबर सेंटर में तैयार होंगे विशेषज्ञ
मलमास के महीने में शादी का निमंत्रण वो भी फोन पर आपको सोचने के लिए मजबूर कर सकता है। लेकिन जब आप भेजने वाले का नाम पढ़ो तो आपको और भी ताज्जुब होगा, और उत्सुकतावश अगर आपने मैसेज को क्लिक किया तो आपके पैरों तले जमीन खिसक जाएगी क्योंकि आपके मोबाइल पर बैंक से डेबिट अमाउंट का मैसेज आ चुका होगा.. जिसको कोई नहीं जानता उसने आपके बैंक अकाउंट से एक बड़ी रकम उड़ा ली है। साइबर ठगों ने आपको राजा से रंक बना दिया समझो। आपको गढ़वाल की वो कहावत याद आ जाएगी, “जांण्यू न पिछाण्यू ज्वाल लैगौ उठैके”। किसी को भी पता नहीं कि किसने आपके बैंक अकाउंट पर सेंध मारी है। पुलिस भी नहीं पहचानती कि ठग कौन है। लेकिन आने वाले वक्त में साइबर ठग अपनी ठगी को आसानी से अंजाम नहीं दे पाएंगे, और खासकर तो उत्तराखंड में तो कतई मुमकिन नहीं हो पाएगा।

दरअसल उत्तराखंड की धामी सरकार साइबर क्राइम को रोकने के लिए कमर कस चुकी है। इसके लिए धामी सरकार ने 31.63 करोड़ रुपए की रकम का इंतजाम किया है। इस रकम से देहरादून में साइबर सेंटर एक्सीलेंस का निर्माण किया जाएगा। जहां साइबर क्राइम के विशेषज्ञ तैयार किए जाएंगे। साइबर अपराध रोकने के तौर तरीकों पर शोध किया जाएगा, तो साइबर अपराध की जांच भी की जाएगी ताकि काबिल साइबर क्राइम विशेषज्ञ अपने ज्ञान का इस्तेमाल कर के साइबर अपराधियों पर नकेल कस सकें। उनके मंसूबों को कामयाब न होने दें। तय है कि आने वाले वक्त में साइबर क्राइम पर लगाम लगेगी और किसी की मेहनत की कमाई को कोई अदृश्य ठग झांसा देकर लूट नहीं पाएगा।





