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उत्तराखंड

होर्मुज संकट के बीच भारत को राहत: टेक्सास का LPG, रूस का तेल मंगलुरु बंदरगाह पहुंचा

मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति में बाधाएं आ रही हैं। ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में, अमेरिका के टेक्सास से 16,714 मीट्रिक टन एलपीजी (LPG) लेकर एक विशाल मालवाहक पोत ‘पायक्सिस पायनियर’ मंगलुरु बंदरगाह पहुँचा है। यह घटनाक्रम भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि मंगलुरु में देश की सबसे बड़ी भूमिगत एलपीजी भंडारण सुविधा स्थित है। इसी के साथ रूस से भारी मात्रा में कच्चा तेल लेकर भी एक अन्य पोत यहाँ पहुँचा है, जो भारत की ईंधन जरूरतों को पूरा करने में सहायक होगा।

टेक्सास से मंगलुरु तक का सफर

एलपीजी लेकर आया ‘पायक्सिस पायनियर’ पोत 14 फरवरी को अमेरिका के टेक्सास स्थित पोर्ट ऑफ नीदरलैंड से रवाना हुआ था। रविवार को न्यू मंगलुरु पोर्ट पर इसकी सुरक्षित लैंडिंग हुई। यह पोत भारी मात्रा में रसोई गैस (LPG) की खेप लेकर आया है, जो क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर आपूर्ति को सुचारू बनाए रखने में मदद करेगा।

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रूस से आया कच्चा तेल

एलपीजी पोत के पहुँचने से ठीक एक दिन पहले, शनिवार को ‘एक्वा टाइटन’ नामक एक रूसी टैंकर भी मंगलुरु तट पर पहुँचा। यह टैंकर 7.7 लाख बैरल कच्चा तेल लेकर आया है। दिलचस्प बात यह है कि यह टैंकर पहले चीन जा रहा था, लेकिन कुछ दिन पहले इसका रुख भारत की ओर मोड़ दिया गया। एक ही दिन के भीतर दो बड़े ऊर्जा पोतों का मंगलुरु पहुँचना भारत की मजबूत वैश्विक स्थिति को दर्शाता है।

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क्यों अहम है मंगलुरु बंदरगाह?

मंगलुरु देश के सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक केंद्रों में से एक है क्योंकि यहाँ देश की सबसे बड़ी ‘अंडरग्राउंड एलपीजी स्टोरेज’ फैसिलिटी (भूमिगत भंडारण सुविधा) मौजूद है। युद्ध जैसी स्थितियों में जब आपूर्ति मार्ग प्रभावित होते हैं, तब इन बड़े पोतों का सीधे मंगलुरु पहुँचना भारत के ऊर्जा बैकअप को सुनिश्चित करता है।

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