उत्तराखंड
ऋषिकेश : सरकारी अस्पताल के भरोसे मत रहना !
उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं के दावों की पोल खोलती ये तस्वीर ऋषिकेश से सामने आई है… जहां सरकारी अस्पताल में मुफ्त मिलने वाला एंटी-रेबीज इंजेक्शन अब मरीजों को चंदा जुटाकर लगवाना पड़ रहा है। चौंकाने वाला मामला Rishikesh के उप जिला चिकित्सालय से सामने आया है। यहां पिछले करीब 15 दिनों से एंटी-रेबीज इंजेक्शन उपलब्ध नहीं है, जिसके चलते मरीजों को मजबूरी में बाहर से दवा खरीदनी पड़ रही है। हालात इतने खराब हैं कि मरीज अब आपस में पैसे इकट्ठा कर इलाज करा रहे हैं। अस्पताल के वैक्सीन रूम में रोजाना 30 से 40 मरीज कुत्ता, बिल्ली और बंदर के काटने के मामले लेकर पहुंचते हैं।
एक एंटी-रेबीज वाइल की कीमत बाजार में करीब 400 रुपये है, जिसमें चार डोज होते हैं। वाइल खुलने के बाद उसकी समय सीमा सिर्फ 4 से 5 घंटे होती है। ऐसे में चार मरीज मिलकर 100-100 रुपये जमा करते हैं और एक वाइल खरीदकर इंजेक्शन लगवाते हैं। मरीजों का कहना है कि पहले यही इंजेक्शन अस्पताल में मुफ्त मिलता था, लेकिन अब दो हफ्तों से इसकी भारी किल्लत बनी हुई है।
गुमानीवाला निवासी सुनीता शर्मा, चंद्रेश्वर नगर के धीरज कुमार, अजय सिंह और सुमन देवी जैसे कई मरीजों ने बताया कि उन्हें अस्पताल में इंजेक्शन नहीं मिला, जिसके बाद मजबूरी में चंदा इकट्ठा कर दवा खरीदनी पड़ी।
एक तरफ राज्य के स्वास्थ्य मंत्री बार-बार बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं और मुफ्त इलाज के बड़े-बड़े दावे करते हैं… तो वहीं दूसरी तरफ जमीनी हकीकत इन दावों को पूरी तरह से कटघरे में खड़ा कर रही है। जहां सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने की बात करती है, वहीं मरीजों को जीवनरक्षक इंजेक्शन के लिए भी पैसे जोड़ने पड़ रहे हैं। अब बड़ा सवाल यही है—क्या यही है उत्तराखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था? और कब तक मरीजों को ऐसे हालात में इलाज के लिए जूझना पड़ेगा?





