Connect with us

उत्तराखंड

इधर बीएड कोर्स हो रहा महंगा,उधर सरकारी स्कूलों में लग रहे ताले

उत्तराखंड राज्य में सरकारी तालीम तमाशा बन रही है. खास कर सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में तो आलम ये है कि, लगातार छात्रों की तादाद घट रही है। अभिभावक सरकारी स्कूलों में अपने नौनिहालों को नहीं पढ़ाना चाहते। दरअसल गैरसैंण के बजट सत्र में पूछे गए सवाल पर जो जवाब मिला उससे दानिशमंद तबके के माथे पर शिकन की लकीरें उभर आई हैं। सल्ट विधायक महेश जीना ने सरकारी स्कूलों का सवाल पूछा जिस पर राज्य के शिक्षा मंत्री डा. धन सिंह रावत ने जो जवाब दिया उससे साफ हो गया है कि, बात निकली है तो दूर तलक जाएगी। सरकारी आंकड़े जो तस्वीर पेश कर रहे हैं वो डराने वाली है।

इसलिए डराने वाली है कि, पिछले पांच सालों में सूबे के तेरह जिलों में 826 स्कूलों को घटती छात्र संख्या के चलते बंद कर दिया गया है। हालांकि राज्य में 10 हजार 940 स्कूल अभी भी संचालित हो रहे हैं। लेकिन जिस तरह से सरकारी स्कूलों से अभिभावकों का मोहभंग हो रहा है उससे साफ पता चल रहा है कि सरकारी तालीम की नब्ज न टटोली गई तो मर्ज बढ़ता चला जाएगा। सरकारी तालीम जड़ से जहां तक बदलाव की राह देख रही है। सवाल सिर्फ सरकारी स्कूलों पर ताले लगने का ही नहीं है, सवाल उन नौजवानों का भी है जो सरकारी अध्यापक बनने की हसरत पाले हुए हैं और लगातार महंगी होती शिक्षा की दुकानों में मोटी फीस देकर बी.एड जैसे कोर्स कर रहे हैं। ताकि भविष्य में वे सरकारी अध्यापक बन सकें।

यह भी पढ़ें 👉  उत्तराखंड बजट 2026: बजट में हर वर्ग के लिए कुछ खास, विपक्ष से सदन में चर्चा का खुला निमंत्रण

लेकिन सवाल ये है कि, अगर सरकारी स्कूल इसी रफ्तार से बंद होते रहे तो उन नौजवानों का सरकारी अध्यापक बनने का सपना अधूरा ही रह जाएगा जिन्होंने मोटी रकम दे कर मास्साब बनने का कोर्स किया है। निजी स्कूलों में अध्यापक की पगार और शोषण के तरीकों से तो शायद सरकार वाकिफ ही होगी। लिहाजा जरूरत है हर उस घाव पर मरहम लगाने की जिससे सरकारी तालीम की सूरत और सीरत चमक सके और अध्यापक बनने की हसरत पाले नौजवानों की उम्मीदों के चिराग रोशन रहें

More in उत्तराखंड

Trending News

Follow Facebook Page