उत्तराखंड
उत्तराखंड चारधाम यात्रा 2026: केदारनाथ की तर्ज पर बदरीनाथ में चलेगी शटल सेवा, श्रद्धालुओं को मिलेगी बड़ी राहत
उत्तराखंड में 2026 चारधाम यात्रा को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए राज्य सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। दरअसल, धामी सरकार ने केदारनाथ में संचालित सोनप्रयाग-गौरीकुंड शटल सेवा की तर्ज पर अब गौचर से बदरीनाथ धाम तक शटल सेवा शुरू करने की तैयारी की जा रही है। माना जा रहा है कि यह व्यवस्था बदरीनाथ धाम जाने वाले श्रद्धालुओं को राहत देने में सक्षम होगी। बताते चलें कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को गैरसैंण में विधानसभा सत्र में बजट अभिभाषण में इस योजना को इसी सत्र से लागू करने का ऐलान किया।
चूंकि, चारधाम यात्रा के दौरान बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाहनों का अत्यधिक दबाव रहता है, खासकर जोशीमठ से बदरीनाथ के बीच लगने वाले ट्रैफिक जाम के कारण श्रद्धालुओं को कई घंटों तक परेशान होना पड़ता है। लिहाजा राज्य सरकार गौचर से बदरीनाथ तक शटल सेवा संचालित करने की योजना पर काम कर रही है।
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत निजी वाहनों से पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को भी शटल सेवा का लाभ मिलेगा। इस कड़ी में निजी वाहनों को गौचर क्षेत्र में पार्क कराया जाएगा, इसके लिए यहां बड़ी पार्किंग बनाई जाएगी, जिसमें कम से कम 1000 हजार से अधिक वाहनों के खड़े होने की सुविधा रहे। यहां से निर्धारित शटल सेवा के माध्यम से यात्रियों को बदरीनाथ धाम तक पहुंचाया जाएगा। इससे एक साथ बड़ी संख्या में वाहनों के बदरीनाथ की ओर जाने पर नियंत्रण रहेगा और मार्ग पर यातायात के दबाव में भी कमी आएगी।
श्रद्धालुओं को राहत, स्थानीय युवाओं को रोजगार
उत्तराखंड सरकार आगामी चारधाम यात्रा को अधिक सुगम और व्यवस्थित बनाने के लिए केदारनाथ की तर्ज पर अब बदरीनाथ धाम के लिए भी ‘गौचर-बदरीनाथ शटल सेवा’ शुरू करने जा रही है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य श्रद्धालुओं को सुरक्षित यात्रा अनुभव प्रदान करने के साथ-साथ स्थानीय लोगों को स्वरोजगार से जोड़ना है। जिस तरह सोनप्रयाग-गौरीकुंड मार्ग पर शटल सेवा अत्यधिक सफल रही है, उसी अनुभव को आधार बनाकर अब 140 किलोमीटर लंबे गौचर-बदरीनाथ मार्ग पर भी वाहनों का संचालन किया जाएगा।
पिछले वर्ष केदारनाथ यात्रा के दौरान लगभग 8.8 लाख श्रद्धालुओं ने शटल सेवा का लाभ उठाया था, जिसमें महिलाओं और बुजुर्गों के लिए विशेष ‘पिंक शटल सेवा’ भी शामिल थी। आरटीओ प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार, करीब 250 वाहनों ने हजारों फेरे लगाकर इस व्यवस्था को प्रभावी बनाया था। नई व्यवस्था के तहत निजी वाहनों को पार्किंग में खड़ा कर शटल सेवा का उपयोग अनिवार्य किया जा सकता है, जिससे यात्रा मार्ग पर ट्रैफिक जाम की समस्या कम होगी और प्रबंधन अधिक पारदर्शी बनेगा। इस नई योजना से न केवल यात्रा सुगम होगी, बल्कि चमोली जिले के स्थानीय वाहन स्वामियों और युवाओं को आर्थिक रूप से सशक्त होने का बड़ा अवसर मिलेगा।





