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उत्तराखंड

उत्तराखंड में सीबकथोर्न खेती शुरू: कैंसर-डायबिटीज में रामबाण इलाज…किसानों की होगी अच्छी कमाई

उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्र न केवल सुंदरता को प्रदर्शित करते हैं बल्कि इनके भीतर ऐसी अनेको जड़ी-बूटियों के भंडार मौजूद हैं जो मनुष्य के लिए अचूक औषधियां प्रदान करते हैं। उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्र में औषधीय गुणों से भरपूर सीबकथोर्न फल इसका सबसे सफल उदाहरण है, मौजूदा समय में बाजारों में सीबकथोर्न फल व जूस की मांग को खासा बढ़ने लगी है। वहीं उत्तराखंड सरकार सीबकथोर्न की बढ़ती मांगो को देखते हुए उच्च हिमालयी क्षेत्रों में उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए योजना बना रही है। इसके लिए राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड की वित्तीय सहायता से वन विभाग द्वारा पिथौरागढ़ जिले के धारचूला विकासखंड की दारमा, व्यास, चौदास घाटियों में सीबकथोर्न की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। आपको बता दें कि सीबकथोर्न समुद्रतल से तीन से चार हजार मीटर की ऊंचाई पर उत्पादित होता है।

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कई बीमारियों में सीबकथोर्न रामबाण इलाज


दरअसल, उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पैदा होने वाला सीबकथोर्न औषधीय गुणों से भरपूर होता है, यही कारण भी है कि खांसी, एलर्जी, त्वचा रोग व आंख के रोगों में सीबकथोर्न का इस्तेमाल किया जाता है। इसके अतिरिक्त सीबकथोर्न में विटामिन सी, ए, ई, के, बी-2, बी-3, बी-5, बी-6 व बी-12, कैरोटिनाइड, एंटीऑक्सीडेंट, रेशे, मैलिक, एसिड, लाइकोपीन, पाल्मीटिक एसिड, एमीनो एसिड, प्रोटीन प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। सीबकथोर्न का मात्र फल ही नहीं बल्कि इसकी पत्तियों को भी औषधीय व न्यूट्रास्यूटिकल उपयोग में लाया जाता है, खासकर कैंसर, गुर्दे की बीमारियां, उच्च रक्तचाप, डायबिटीज, शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, एलर्जी, हृदय टोनिक में इसका भरपूर उपयोग किया जाता है।

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सीबकथोर्न का फल, पत्तियां तो औषधिय हैं ही बल्कि इसका वृक्ष भी प्रकृति संरक्षण में सहयोगी होता है। दरअसल, सीबकथोर्न की जड़ें भूमि में गहरे रुप से फैलती है लिहाजा इससे भूमि कटाव कम होता है। वहीं उच्च हिमालयी क्षेत्रों में रेतीली भूमि होने के कारण भूमि का अत्यधिक कटाव होता है, लेकिन अब व्यास घाटी के गरव्यांग गांव में सीबकथोर्न फल सबसे अधिक उत्पादित होगा। औषधीय गुण के कारण सीबकथोर्न फल की बाजार में काफी मांग है। इसके फल से तैयार जूस 500 रुपये प्रति लीटर तक बिक रहा है। सरकार का कहना है कि इसकी खेती से उच्च हिमालयी क्षेत्रों के किसानों की आमदनी बढ़ेगी।

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