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उत्तराखंड

CAPF में नया कानून लागू: राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद 5 बलों के लिए एकसमान सेवा नियम

केंद्र सरकार ने ‘केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य) प्रशासन कानून’ को आधिकारिक तौर पर लागू कर दिया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी के बाद इसे राजपत्र (Gazette) में प्रकाशित किया गया है। इस नए कानून का मुख्य उद्देश्य सीआरपीएफ , बीएसएफ, सीआईएसएफ, आईटीबीपी और एसएसबी जैसे विभिन्न बलों के बीच अलग-अलग सेवा नियमों को समाप्त कर एक समान कानूनी ढांचा प्रदान करना है। इससे न केवल आंतरिक सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि बलों के भीतर प्रशासनिक स्पष्टता आएगी और कमांड ढांचा पहले से बेहतर होगा। यह कानून विशेष रूप से समूह ‘ए’ अधिकारियों और अन्य कर्मियों की भर्ती, पदोन्नति और सेवा शर्तों को सुव्यवस्थित करने के लिए बनाया गया है।

IPS कोटा अनिवार्य और उच्च पदों पर नियुक्ति

इस कानून की एक प्रमुख विशेषता यह है कि अब अर्धसैनिक बलों में आईपीएस (IPS) कोटा अनिवार्य कर दिया गया है। महानिरीक्षक (IG) स्तर के 50 फीसदी और अतिरिक्त महानिदेशक (ADG) के कम से कम 67 फीसदी पद प्रतिनियुक्ति के माध्यम से भरे जाएंगे। इसके अलावा, विशेष महानिदेशक (SDG) और महानिदेशक (DG) के सभी पद केवल आईपीएस अधिकारियों के लिए आरक्षित होंगे, जिससे नेतृत्व के पदों पर उनकी भूमिका और मजबूत होगी।

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निरंतरता और अधिभावी शक्तियां

नया कानून यह सुनिश्चित करता है कि अधिकारियों को मिलने वाले पुराने वित्तीय लाभ तब तक जारी रहेंगे जब तक नए प्रावधान पूरी तरह लागू नहीं हो जाते। यह कानून अपने प्रावधानों को किसी भी पुराने या असंगत कानून पर प्राथमिकता (Overriding effect) देता है, जिससे प्रशासन में एकरूपता बनी रहे। केंद्र सरकार को नियमों में संशोधन करने और संचालन संबंधी किसी भी कठिनाई को दूर करने की विशेष शक्तियां भी दी गई हैं।

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केंद्र-राज्य समन्वय और आंतरिक सुरक्षा

यह कानून केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल पर जोर देता है। आंतरिक सुरक्षा बनाए रखने और राज्यों की सहायता करने में CAPF की भूमिका को इस कानून के जरिए और अधिक स्पष्ट किया गया है। इससे सेवा संबंधी मामलों में अस्पष्टता कम होगी, प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी और बलों के भीतर नेतृत्व संरचना और अधिक सुदृढ़ होगी।

एकीकृत सेवा नियम (Unified Service Rules)

अब तक अलग-अलग बलों के लिए अलग-अलग नियम होने के कारण समन्वय में दिक्कतें आती थीं। नए कानून ने इन सभी को एक व्यापक व्यवस्था के तहत ला दिया है। मोटे तौर पर, यह अधिकारियों की भर्ती प्रक्रियाओं और प्रतिनियुक्ति से संबंधित मामलों को पूरी तरह सुव्यवस्थित करने का काम करेगा।

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