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उत्तराखंड

UKPSC Recruitment: हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, असफल अभ्यर्थियों को भी अपनी उत्तर पुस्तिकाएं देखने का कानूनी अधिकार

नैनीताल हाईकोर्ट ने उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (UKPSC) की चयन परीक्षा प्रक्रिया को लेकर एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने आयोग के उस नियम (नोट-4) को असंवैधानिक घोषित कर दिया है, जिसके तहत अभ्यर्थियों को परीक्षा के अंतिम परिणाम आने से पहले अपनी उत्तर पुस्तिकाएं (Answer Sheets) देखने की अनुमति नहीं थी। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने स्पष्ट किया है कि असफल उम्मीदवारों को भी यह जानने का पूरा अधिकार है कि उनका मूल्यांकन कैसे हुआ है। इस फैसले से भर्ती परीक्षाओं में अधिक पारदर्शिता आने की उम्मीद है और यह उन हजारों युवाओं के लिए बड़ी राहत है जो अपनी उत्तर पुस्तिकाओं के निरीक्षण के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे।

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हाईकोर्ट ने UKPSC के नियम को बताया असंवैधानिक

अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए उत्तराखंड लोक सेवा आयोग के चयन प्रक्रिया संबंधी ‘नोट-4’ को रद्द कर दिया है। इस नियम के कारण आयोग अंतिम परिणाम घोषित होने तक अभ्यर्थियों को उनकी कॉपियां दिखाने से इनकार कर देता था। कोर्ट ने इसे मौलिक अधिकारों का हनन मानते हुए स्पष्ट किया कि परिणाम के किसी भी चरण में अभ्यर्थी को अपनी उत्तर पुस्तिका देखने का हक है।

एपीएस (APS) भर्ती परीक्षा से जुड़ा है मामला

यह पूरा विवाद सचिवालय और लोक सेवा आयोग में ‘अतिरिक्त निजी सचिव’ (APS) के 99 पदों के लिए हुई भर्ती परीक्षा से शुरू हुआ। राजवीर सिंह, रणवीर सिंह तोमर और रुचि राणा समेत कई अभ्यर्थियों ने शॉर्टहैंड परीक्षा के परिणामों को चुनौती दी थी। उनका दावा था कि पहले चरण की अन्य परीक्षाओं में अच्छा प्रदर्शन करने के बावजूद उन्हें शॉर्टहैंड में कम अंक मिले, जिसकी जांच के लिए वे अपनी उत्तर पुस्तिकाएं देखना चाहते थे।

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पारदर्शिता के लिए उठाया गया कदम

अभ्यर्थियों का तर्क था कि मूल्यांकन में त्रुटि की आशंका होने पर कॉपी देखना उनका अधिकार है। आयोग के पुराने नियमों की वजह से उन्हें यह मौका नहीं मिल पा रहा था। हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद अब भविष्य में होने वाली सभी परीक्षाओं में आयोग को उत्तर पुस्तिकाओं के निरीक्षण के लिए नई व्यवस्था लागू करनी होगी, जिससे भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी की गुंजाइश कम होगी।

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