उत्तराखंड
उत्तराखंड में बॉर्डर टूरिज्म और वाइब्रेंट विलेज योजना से रुक रहा पलायन: मुख्यमंत्री धामी
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सीमांत क्षेत्रों में बॉर्डर टूरिज्म को तेजी से विकसित करने के उद्देश्य से एक बड़ी घोषणा की है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार रिमखिम और बाड़ाहोती जैसे महत्वपूर्ण सीमांत क्षेत्रों में जल्द ही ‘सीमा दर्शन केंद्र’ का निर्माण कराने जा रही है।
यह घोषणा उन्होंने नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन के पुरस्कार वितरण समारोह में वर्चुअली जुड़ते हुए की। लगभग 11 हजार फीट की भारी ऊंचाई पर आयोजित हुई इस अल्ट्रा रन की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह प्रतियोगिता युवाओं के अदम्य साहस, ऊर्जा और आत्मविश्वास का एक बड़ा प्रतीक बनकर उभरी है।
इस पूरे अभियान को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में संचालित की जा रही ‘वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम’ से जोड़ा गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य देश के सीमांत गांवों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार करना है। मुख्यमंत्री के अनुसार, इस योजना से न केवल सीमांत क्षेत्रों में पर्यटन और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे बल्कि वहां की स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिलेगी, जिससे क्षेत्र से होने वाले पलायन को रोकने और ‘रिवर्स पलायन’ को बढ़ावा देने में मदद मिल रही है।
इसका एक बड़ा प्रमाण यह है कि नीति क्षेत्र में होम स्टे की संख्या 35 से बढ़कर अब सीधे 450 हो गई है, जो इस क्षेत्र में पर्यटन की बढ़ती संभावनाओं को साफ दर्शाता है। सरकार का संकल्प है कि विकास का यह अभियान प्रदेश की हर एक सीमांत घाटी तक पहुंचेगा।
सीमा दर्शन केंद्र के साथ-साथ सीएम धामी ने चमोली जिले के नीति, मलारी, कोषा, फरकियॉ, बांपा, गुरगुटी, कैलाशपुर व महरगांव जैसे कई क्षेत्रों के लिए भी महत्वपूर्ण विकास कार्यों का ऐलान किया है। इन गांवों में सामुदायिक सहभागिता पर आधारित पर्यटन को प्रोत्साहित करने के लिए बुनियादी सुविधाओं के विकास के साथ-साथ सामुदायिक होम स्टे का निर्माण किया जाएगा।
इसके अलावा, घाटी के विभिन्न गांवों और मुख्य पर्यटन स्थलों पर आने वाले पर्यटकों की सुविधा के लिए नए साइनेज एवं व्यू पॉइंट विकसित किए जाएंगे, साथ ही गमशाली गांव में स्थित दुफ्फूधार मैदान में भी आधारभूत सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा ताकि क्षेत्र का कायाकल्प हो सके।




