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उत्तराखंड

उत्तराखंड हेली सेवाएं: धामी सरकार का हेली विस्तार…बद्रीनाथ-यमुनोत्री को जोड़ेगी उड़ानें

उत्तराखंड एक पर्वतीय राज्य है लिहाजा उत्तराखंड के विकास में भौगोलिक परिस्थितियां हमेशा ही आड़े आई हैं। ऊंचे-नीचे पथरीले पहाड़, संकरे रास्ते और पल में ही अपनी करवट बदल लेने वाला मौसम उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों को विषम बनाता है, तो वहीं प्रदेश के कई क्षेत्रों तक सड़क मार्ग से पहुंचना ही अपने आप मे एक चुनौती है। ऐसी स्थिति में उत्तराखंड वासियों के लिए राज्य सरकार की हेली सेवाओं की पहल वरदान और उम्मीद की नई किरण बनकर उभरी है। आपको बता दें कि वर्तमान समय में उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले से लेकर केदारनाथ व चिन्यालीसौड़ तक हेली सेवाएं अपनी उड़ाने भर रही हैं।


वहीं साल 2025 में हवाई सेवा उत्तराखंड में आई प्राकृतिक आपदाओं के समय राहत-बचाव कार्य के समय पर अति-सहायक साबित हुई, जिस कारण ही प्रभावितों को भी सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जा सका। वहीं पर्यटन के पहलू से देखा जाए तो केदारनाथ में संचालित भी हेली सेवाएं बुजुर्ग व दिव्यांग यात्रियों के लिए लाभकारी साबित हो रही है। वहीं अब राज्य की धामी सरकार इसका दायरा बढ़ाने पर कार्य कर रही है, इस क्रम में साल 2026 में हेली सेवाओं के विस्तार की उम्मीद बंधी है।

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2026 में चारधाम को जोड़ने लगेगी हेली सेवाएं


उत्तराखंड मे वर्तमान समय पर चारों धामों में से मात्र केदारनाथ के लिए ही हेली शटल सेवा संचालित की गई है, लेकिन माना जा रहा है कि साल 2026 में प्रदेश के दो अन्य धाम बदरीनाथ व यमुनोत्री के लिए भी हेली शटल सेवा शुरु हो सकती है। दरअसल, इस क्रम में नागरिक उड्डयन विभाग गौचर से बदरीनाथ और जानकी चट्टी से यमनोत्री तक के लिए हेली सेवा के संचालन पर कार्य कर रहा है, इस कड़ी में टेंडर्स जारी करने का कार्य अभी प्रगति पर है। वहीं उड्डयन विभाग सभी धामों को हेली शटल सेवाओं से सुरक्षित तौर पर जोड़ने के लिए SOP तैयार कर रहा है, साथ ही फाटा के आसपास एयरपोर्ट विकसित करने का भी प्रयास लगातार जारी है। बहरहाल, माना जा रहा है कि इन दोनों धामों में हेली सेवाओं का संचालन तीर्थ यात्रियों और पर्यटकों का सफर आसान तो करेगा ही बल्कि पर्यटन को भी बढ़ावा देगा।

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सीमान्त क्षेत्र हवाई अड्डों का हो रहा विस्तार


उत्तराखंड की धामी सरकार अब पिथौरागढ़ हवाई अड्डे के विस्तार पर कार्य कर रही है, ध्येय है कि इसे थ्री-सी श्रेणी के रूप में उच्चीकृत किया जाए और यहां 72 सीटर हवाई जहाज उतारे जा सकें। चूंकि सीमान्त क्षेत्र होने के कारण सामरिक दृष्टि से भी यह हवाई अड्डा महत्वपूर्ण है लिहाजा विस्तारीकरण करने से इससे यात्रियों की आमद बढ़ेगी। इसके साथ ही विभाग अब देहरादून से पिथौरागढ़ के बीच हवाई सेवा की दिशा में भी आगे कदम बढ़ा रहा है। वहीं नागरिक उड्डयन विभाग की योजना गुंजी में एयर स्ट्रिप बनाने की भी है। इसके लिए यहां जमीन का चिह्नीकरण किया जा रहा है। सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होने के कारण यह एयर स्ट्रिप पर्यटकों के साथ ही सेना के लिए भी खासी अहम साबित होगी।

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