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उत्तराखंड

उत्तराखंड में मानसून की तूफानी दस्तक, 4 जुलाई तक भारी बारिश का अलर्ट; दून के 29 संवेदनशील इलाकों पर पैनी नजर

देहरादून। उत्तराखंड में जून के महीने में सूखे जैसे हालात रहने के बाद जुलाई की शुरुआत होते ही मानसून ने बेहद तूफानी अंदाज में दस्तक दे दी है। मंगलवार और बुधवार को हुई जोरदार झमाझम बारिश ने राजधानी देहरादून समेत प्रदेश के अधिकांश हिस्सों को पूरी तरह तरबतर कर दिया है।

मौसम निदेशक डॉ. सी.एस. तोमर के मुताबिक मानसून की यह शुरुआत सकारात्मक है। विभाग ने आगामी 4 जुलाई तक प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इसे देखते हुए देहरादून के जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने सभी विभागों को तुरंत अलर्ट मोड पर रहने के सख्त निर्देश दिए हैं।

बीते 24 घंटों के भीतर उत्तराखंड में औसतन 13.4 मिमी वर्षा दर्ज की गई है, जो सामान्य से लगभग 30 फीसदी अधिक है। अकेले देहरादून में ही 62 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई, जिससे तापमान गिरने से लोगों को उमस से राहत तो मिली, लेकिन बुधवार सुबह रेंजर्स ग्राउंड के पास सड़क पर भारी जलभराव से मुसाफिरों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

कहीं सामान्य से 4 गुना बारिश, कहीं सूखा

मानसून के पहले 24 घंटों में बागेश्वर जिले में सबसे ज्यादा 45.4 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से करीब चार गुना अधिक है। इसके अलावा चंपावत में 301%, चमोली में 173%, देहरादून में 87%, पिथौरागढ़ में 64% और उधमसिंह नगर में 78% अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई। इसके विपरीत पौड़ी गढ़वाल में सामान्य से 72% कम, नैनीताल में 73% कम और उत्तरकाशी में 71 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले एक-दो दिन में हरिद्वार में भी मानसून पूरी तरह सक्रिय हो जाएगा।

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देहरादून में पिछले वर्षों में मानसून के पहले दिन का वर्षा रिकॉर्ड देखें तो साल 2022 में 64.5 मिमी, 2023 में 64.0 मिमी, 2024 में 46.2 मिमी, 2025 में 70.0 मिमी और इस वर्ष 2026 में 62.0 मिमी बारिश दर्ज की गई है। जून में 37% कम बारिश के बाद जुलाई की इस शुरुआत ने खेती-किसानी और जलाशयों के लिए राहत की उम्मीद जगाई है।

मौसम विभाग के भारी अलर्ट के बाद एक्शन में जिला प्रशासन

मौसम विभाग की चेतावनी के बाद देहरादून के डीएम डॉ. आशीष चौहान ने साफ कहा है कि आपदा प्रबंधन में किसी भी विभाग की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। उन्होंने निर्माण कार्यों के लिए खोदी गई सड़कों को तुरंत दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं ताकि कोई हादसा न हो।

डीएम ने बुधवार को खुद आपदा कंट्रोल रूम का औचक निरीक्षण किया और इसे 24 घंटे पूरी तरह सक्रिय रखने को कहा। इसके बाद उन्होंने एनआईसी सभागार से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सभी एसडीएम और विभागीय अधिकारियों के साथ आपात बैठक की।

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29 संवेदनशील स्थान चिन्हित, 3700 परिवारों पर पैनी नजर

बैठक में डीएम ने बताया कि नगर निगम देहरादून और ऋषिकेश क्षेत्र के अंतर्गत जलभराव और नदी किनारे के 29 संवेदनशील स्थान चिन्हित किए गए हैं। इन क्षेत्रों में रहने वाले करीब 3700 परिवारों और 900 घरों की सुरक्षा के लिए विशेष निगरानी रखी जा रही है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए इन स्थानों पर चेतावनी सायरन बजाए जाएंगे और सीसीटीवी कैमरों से लाइव मॉनिटरिंग होगी। साथ ही क्विक रिस्पांस टीम को भी तैनात कर दिया गया है।

आज 7 सबसे संवेदनशील स्थानों पर महा-मॉक ड्रिल

बारिश और संभावित आपदा से निपटने की तैयारी को परखने के लिए प्रशासन द्वारा दो जुलाई को जिले के सात सबसे संवेदनशील स्थानों पर मॉक ड्रिल का आयोजन किया जा रहा है। इसके लिए दूधली, सुसवा और सोंग नदी के किनारे स्थित गौहरीमाफी, कालसीगाड़, लंबीधार-किमाड़ी मार्ग, चकराता-मोहरी मार्ग, विकासनगर का जमनीपुर तथा सहस्रधारा क्षेत्र को चिन्हित किया गया है।

डीएम ने अंत में पेयजल, बिजली, सड़कों और जलनिकासी व्यवस्था को दुरुस्त रखने के कड़े निर्देश दिए। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि लापरवाही से कोई दुर्घटना हुई तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होगी। इसके साथ ही सुरक्षा के मद्देनजर जुलाई से 30 सितंबर तक नदियों में खनन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।

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