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उत्तराखंड

उत्तराखंड में चयनित डॉक्टरों में से सिर्फ 30 फीसदी ही दे रहे सेवाएं

उत्तराखंड के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है, क्योंकि यहाँ नियुक्त होने वाले 70 फीसदी डॉक्टर सरकारी नौकरी में टिक नहीं पा रहे हैं। राज्य गठन के बाद से अब तक विभिन्न भर्तियों के माध्यम से चयनित डॉक्टरों में से केवल 30 फीसदी ही वर्तमान में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, यही वजह है कि राज्य के कई दूरदराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह बदहाल हैं।

स्वास्थ्य विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, राज्य बनने के बाद से अलग-अलग विज्ञापनों के जरिए करीब नौ हजार पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई थी, जिसमें से सात हजार डॉक्टरों का चयन हुआ; लेकिन इनमें से सिर्फ तीन हजार डॉक्टरों ने ही ड्यूटी ज्वाइन की और बाद में एक हजार डॉक्टरों ने नौकरी से इस्तीफा दे दिया।

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विभाग में डॉक्टरों के स्वीकृत कुल 2800 पदों में से वर्तमान में लगभग 2100 डॉक्टर ही कार्यरत हैं, जबकि 700 डॉक्टरों के पद आज भी खाली चल रहे हैं। सरकार ने इन रिक्तियों को भरने के लिए बॉन्ड और संविदा के आधार पर डॉक्टरों की व्यवस्था तो की है, लेकिन स्थायी तैनाती न होने के कारण स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड में ये पद अभी भी रिक्त ही दिखाए जा रहे हैं।

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इस गंभीर मामले पर राज्य के स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल का कहना है कि वर्तमान में मेडिकल अफसरों को लेकर अब कोई बड़ी दिक्कत नहीं है, हालांकि स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की कुछ कमी अभी बनी हुई है, जिसे जल्द ही दूर करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

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