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उत्तराखंड

उत्तराखंड में मौसम का डबल अटैक: दून में उमस के बीच 5 पहाड़ी जिलों में बारिश-बर्फबारी का अलर्ट जारी

देहरादून और उसके आसपास के क्षेत्रों में बुधवार को भीषण गर्मी का प्रकोप देखने को मिला, जहां अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जिसके कारण दिनभर लोग उमस और चटक धूप से बेहद परेशान रहे; हालांकि दोपहर बाद कुछ इलाकों में हुई हल्की बूंदाबांदी ने लोगों को थोड़ी राहत जरूर पहुंचाई।

मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक डॉ. सी.एस. तोमर के मुताबिक, आगामी 24 घंटों के भीतर उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जैसे पर्वतीय जिलों में अनेक स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने के आसार हैं, जबकि 4200 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी की संभावना भी जताई गई है।

इसके साथ ही देहरादून, टिहरी और नैनीताल में कुछ स्थानों पर गरज के साथ बौछारें पड़ने की उम्मीद है और पर्वतीय इलाकों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलने व आकाशीय बिजली चमकने को लेकर लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

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दूसरी तरफ, प्रसिद्ध पर्यटन स्थल मसूरी में बुधवार शाम को तेज हवाओं के साथ हुई झमाझम बारिश से मौसम बेहद सुहाना और ठंडा हो गया, जहां दिनभर की धूप के बाद शाम छह बजे बादलों ने करवट ली और मालरोड पर घूम रहे पर्यटकों को भीषण गर्मी से बड़ी राहत मिली।

इस दौरान देहरादून का अधिकतम तापमान 35.0 डिग्री और न्यूनतम तापमान 22.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि पंतनगर में अधिकतम तापमान 36.8 डिग्री, न्यू टिहरी में 26.4 डिग्री और मुक्तेश्वर में 23.1 डिग्री सेल्सियस रहा।

इसी बीच, देश भर के मौसम को लेकर एक चिंताजनक खबर भी सामने आई है कि शुरुआती तेजी के बाद दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार अचानक सुस्त पड़ गई है और मध्य व पश्चिम भारत के कई क्षेत्रों में मानसूनी बादलों की भारी कमी देखी जा रही है।

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IMD के आंकड़ों के मुताबिक, 14 से 16 जून के बीच मध्य भारत में सामान्य तौर पर 55.2 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन मानसून कमजोर होने के कारण इस अवधि में केवल 19.2 मिमी बारिश ही दर्ज की गई, जो सामान्य से लगभग 65 प्रतिशत कम है।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार मानसून की रफ्तार थमने की मुख्य वजह उत्तर-पश्चिम भारत से चलने वाली सूखी और गर्म पछुआ हवाएं हैं, जिन्होंने बंगाल की खाड़ी से आने वाली नम मानसूनी हवाओं के प्रवाह को रोक दिया है और इसी वजह से देश के बड़े हिस्से में मानसून की प्रगति फिलहाल धीमी हो गई है।

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