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उत्तराखंड

उत्तराखंड सरकारी खर्चों पर लगाम: फर्नीचर-उपकरणों की मनमानी खरीद पर वित्त विभाग की अनुमति अनिवार्य

उत्तराखंड सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए आय-व्यय की वित्तीय स्वीकृतियां जारी कर दी हैं। वित्त सचिव दिलीप जावलकर द्वारा जारी इन निर्देशों के अनुसार, अब सरकारी विभाग अपनी मर्जी से कार्यालयों के लिए भारी-भरकम फर्नीचर या अन्य उपकरण नहीं खरीद पाएंगे। बजट में किए गए प्रावधानों के अनुसार ही धनराशि खर्च की जाएगी, और बड़े खर्चों के लिए वित्त विभाग से पूर्व अनुमति लेना अब अनिवार्य कर दिया गया है। इसका उद्देश्य सरकारी धन के सदुपयोग को सुनिश्चित करना और अनावश्यक खर्चों पर रोक लगाना है।

10 करोड़ से अधिक के खर्च पर वित्त विभाग की मंजूरी

नए नियमों के मुताबिक, यदि किसी विभाग को कार्यालय के लिए फर्नीचर, उपकरण या वाहन खरीदने, भूमि क्रय करने या भवन निर्माण के लिए 10 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च करनी है, तो उसे पहले वित्त विभाग से अनुमति लेनी होगी। इसके अलावा, व्यावसायिक और विशेष सेवाओं के भुगतान के लिए भी यही नियम लागू होगा।

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आयोजनों और मेलों के लिए भी तय की गई सीमा

सरकारी विभागों द्वारा आयोजित किए जाने वाले सम्मेलनों, कार्यशालाओं, मेलों, प्रदर्शनियों और शिविरों पर होने वाले खर्चों को भी सीमित किया गया है। यदि ऐसे किसी आयोजन पर 25 लाख रुपये से अधिक का व्यय होता है, तो इसके लिए वित्त विभाग की सहमति जरूरी होगी।

भुगतान की किस्तों और उपयोगिता प्रमाणपत्र (UC) के नियम

विभाग अब कार्यदायी संस्थाओं को एक साथ पूरा भुगतान नहीं करेंगे, बल्कि यह भुगतान तीन किस्तों में किया जाएगा। दूसरी किस्त जारी करने से पहले विभाग को यह सुनिश्चित करना होगा कि पहली किस्त की 70% राशि खर्च हो चुकी है और उसका उपयोगिता प्रमाणपत्र (Utilisation Certificate) देना भी अनिवार्य होगा।

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जिम्मेदारी और प्राथमिकताओं का निर्धारण

इन दिशा-निर्देशों के पालन की पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभागों के प्रमुख सचिव, सचिव और विभागाध्यक्षों की होगी। साथ ही, विभागों को निर्देश दिया गया है कि बजट में आय-व्यय के प्रावधानों से सबसे पहले राज्य आकस्मिक निधि से ली गई राशि की भरपाई की जाए। वर्तमान में चल रहे निर्माण कार्यों के लिए वित्तीय स्वीकृति उनकी भौतिक प्रगति (Physical Progress) को देखकर ही जारी की जाएगी।

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