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उत्तराखंड

पहाड़ में पलायन का साइड इफेक्ट! इंसानों ने छोड़े गांव तो बस्तियों में घूमने लगे भालू और तेंदुए

कहते हैं जिस भवन की बुनियाद सही नहीं होती उसका कंगूरा तमाम कोशिश के बाद भी जचता नहीं है। शायद इन्ही हालात से उत्तराखंड के पहाड़ी इलाके दो-चार हो रहे हैं। गांवों में लाइलाज होता जा रहा पलायन का रोग बड़ी तेजी से फैल रहा है। सरकार की कोशिशों की वैक्सीन शायद एक्सपायर डेट की हो गई है लिहाजा असरदार नतीजे नहीं दे पा रही है।

रोग मुक्त होने के लिए बड़ी शल्य चिकित्सा की दरकार है लेकिन उसके लिए अभी तक कोई भी सरकार तैयार नहीं हुई लिहाजा पहाड़ो के रिहायशी इलाकों में इंसानो से ज्यादा जंगली जानवर चहलकदमी कर रहे हैं।

ताजा खबर श्रीनगर विधानसभा क्षेत्र के पैठाणी इलाके की है जहा भालू ने एक 33 साल के नौजवान पर हमला कर उसे जख्मी कर दिया। बताया जा रहा है कि घायल शख्स उस वक्त अपनी मवेशियो को चुगा रहा था । तभी पास में मौजूद झाड़ियों में छिपे भालू ने अचानक से उस पर हमला कर दिया।

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हालांकि युवक ने साहस दिखाकर भालू के जबड़े को पकड़ लिया और तब तक भालू को हमलावर होने से रोके रखा जब तक गांव में मौजूद लोग उसकी मदद के लिए वहां पहुंच नहीं गए। हालांकि भालू से भिड़ते हुए वह भी गंभीर रूप से जख्मी हो गया। जिसको इलाज के लिए वीर चंद्रसिंह गढ़वाली मेडिकल कालेज के अस्पताल में दाखिल करवाया गया।

जहां इलाज के बाद जख्मी शख्स की हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। जब गांव में आबादी थी तब जंगली जानवर जंगलों में ही रहते थे इंसानी बस्ती की सरहद को लांघा नहीं करते थे। लेकिन अब वक्त बदल गया है लिहजा इंसान का भी और जानवर का भी दोनो का मिजाज बदल गया है।

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जानवर जंगल से बाहर बस्तियों में निवाला तलाश रहा है और इंसान गांवों की सरहदों को लांघ कर प्रदूषित होते शहरो में पानी बिजली की किल्लत के बीच सुकून तलाश रहा है। लिहाजा जरूरत है एक बड़ी योजना की जिस पर अमल कर गांव और जंगल आबाद हो सके। परिवार गांव में बेफिक्री से रह सके और जानवर जंगल में सुकून से रह सके।

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