उत्तराखण्ड
भारत में एलपीजी संकट से राहत: होर्मुज जलमार्ग पार कर 60 हजार टन गैस लेकर गुजरात पहुँच रहे दो बड़े टैंकर
खाड़ी क्षेत्र में जारी युद्ध और तनाव के बीच भारत के लिए राहत की खबर आई है। होर्मुज जलमार्ग के चुनौतीपूर्ण रास्ते को पार कर दो बड़े गैस टैंकर 60,000 टन से अधिक घरेलू एलपीजी लेकर भारत पहुँच रहे हैं। इनमें से पहला टैंकर ‘ग्रीन सान्वी’ मंगलवार को गुजरात के दाहेज बंदरगाह पहुँचेगा, जबकि दूसरा टैंकर ‘ग्रीन आशा’ 9 अप्रैल को वाडिनार बंदरगाह पहुँचेगा। इन टैंकरों के आने से देश में घरेलू रसोई गैस की उपलब्धता सुनिश्चित होगी और संभावित किल्लत का खतरा टलेगा।
गुजरात के दाहेज और वाडिनार पहुँचेंगे टैंकर
बंदरगाह, जहाजरानी एवं जलमार्ग मंत्रालय के अनुसार, जहाज ‘ग्रीन सान्वी’ में लगभग 46,650 टन घरेलू एलपीजी गैस लदी हुई है, जो दाहेज बंदरगाह पर उतरेगी। वहीं, दूसरा टैंकर ‘ग्रीन आशा’ करीब 15,500 टन एलपीजी लेकर वाडिनार बंदरगाह पहुँचेगा। मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव मुकेश मंगल ने पुष्टि की है कि इन जहाजों के सुचारू संचालन के लिए सभी जरूरी इंतजाम पूरे कर लिए गए हैं।
खाड़ी क्षेत्र में तनाव के बीच बड़ी उपलब्धि
वर्तमान में खाड़ी क्षेत्र में युद्ध के हालात होने के कारण समुद्री व्यापार प्रभावित हो रहा है। बताया जा रहा है कि अभी भी उस क्षेत्र में करीब 16 गैस और तेल टैंकर फँसे हुए हैं। ऐसे में होर्मुज जलमार्ग जैसे संवेदनशील रास्ते से इन दो टैंकरों का सुरक्षित निकलकर भारत पहुँचना एक बड़ी रणनीतिक और आर्थिक उपलब्धि है। ‘ग्रीन आशा’ टैंकर पर फिलहाल 26 नाविक सवार हैं और इसकी सुरक्षा पर विशेष नजर रखी जा रही है।





