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उत्तराखंड SIR विवाद: अंतिम दिन 8 हजार वोटर लिस्ट से बाहर, कांग्रेस ने चुनाव आयोग को घेरा

देहरादून। उत्तराखंड में SIR प्रक्रिया के तहत 28 सितंबर को सुनवाई की अंतिम तिथि की मध्य रात्रि यानी रात 12 बजे से ठीक पहले 7,927 मतदाताओं को सूची से बाहर कर दिया गया, जिससे राज्य की राजनीति में भूचाल आ गया है। इसी दिन एसआईआर का पूरा डेटा भी फ्रीज कर दिया गया, जिसके बाद मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इस कार्रवाई के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए राज्य निर्वाचन आयोग को आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई है।

कांग्रेस पार्टी ने आरोप लगाया है कि निर्वाचन आयोग की यह पूरी कार्रवाई तय प्रशासनिक नियमों के विपरीत है, जिससे हजारों वैध मतदाताओं के मताधिकार पर सीधा असर पड़ा है. पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने इस संबंध में आयोग को ईमेल और पत्र भेजकर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है तथा मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है।

कांग्रेस की मुख्य आपत्ति यह है कि 26 सितंबर की मध्य रात्रि को हरिद्वार ग्रामीण में 3,503, विकासखंड में 2,444 और गदरपुर में 1,980 मतदाताओं को फॉर्म-7 के तहत अचानक नोटिस जारी किए गए थे. नियमों के अनुसार फॉर्म-10 जनरेट होने के बाद प्रत्येक प्रभावित मतदाता को अपना पक्ष रखने और सुनवाई का पूरा अवसर मिलना चाहिए था, जिसकी अनदेखी की गई।

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पार्टी का यह भी कहना है कि ईआरओ (ERO) एक साथ आपत्तिकर्ता, मामलों की जांच करने वाला प्राधिकारी और निर्णय देने वाला प्राधिकारी नहीं हो सकता. कांग्रेस के मुताबिक, वर्तमान मामले में यह पूरी कार्रवाई सीधे तौर पर ईआरओ के स्तर पर ही संपादित की गई है, जो प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए चेतावनी दी है कि अंतिम वोटर लिस्ट जारी होने से पहले अगर इन सभी आपत्तियों का कानूनी समाधान नहीं किया गया, तो पार्टी अदालत का दरवाजा खटखटाएगी. उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पूरी मनमानी में शामिल अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की जाएगी।

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कांग्रेस का मुख्य तर्क है कि पूरी प्रक्रिया से ऐसा प्रतीत होता है कि निर्वाचन मशीनरी ने खुद ही फॉर्म-7 जनरेट किया, खुद ही उसकी भौतिक व कागजी जांच की और फिर उसी आधार पर नाम हटाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया. कांग्रेस का आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया में निर्वाचन तंत्र खुद ही मुख्य निर्णयकर्ता की भूमिका में आ गया है।

कांग्रेस के इन तीखे हमलों के बाद भारतीय जनता पार्टी ने भी पलटवार करते हुए कांग्रेस पर करारा प्रहार किया है. भाजपा के मुख्य प्रवक्ता सुरेश जोशी ने कहा कि मतदाता सूची की शुचिता पर सवाल उठाने से पहले कांग्रेस को अपने दावों के समर्थन में पुख्ता सबूत जनता के सामने रखने चाहिए. उन्होंने कहा कि इस तरह के बेबुनियाद और निराधार आरोप लगाना केवल कांग्रेस की राजनीतिक बौखलाहट और निराशा को दर्शाता है।

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