उत्तराखंड
Uttarakhand: बीमारियों की रोकथाम के लिए एक्शन में स्वास्थ्य महकमा, DG हेल्थ ने जारी किए कड़े आदेश
देहरादून। उत्तराखंड में संक्रामक बीमारियों की रोकथाम और उनके प्रभावी नियंत्रण के लिए स्वास्थ्य महकमा पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। मंगलवार को स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. सुनीता टम्टा ने राज्य के सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों और मुख्य चिकित्सा अधीक्षकों को अस्पतालों में आने वाले मरीजों की कड़ी निगरानी रखने और उन्हें बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश जारी किए हैं।
प्रशासकीय समीक्षा बैठक के दौरान स्वास्थ्य महानिदेशक ने अधिकारियों को संभावित बीमारियों और उनके संक्रमण की स्थिति पर लगातार पैनी नजर रखने को कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि प्रदेश में कहीं भी कोई असाधारण या असामान्य स्थिति सामने आती है, तो बिना देरी तत्काल आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई की जाए।
डॉ. सुनीता टम्टा ने प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और संबंधित चिकित्सा इकाइयों में आवश्यक दवाओं, जांच सुविधाओं और चिकित्सा उपकरणों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए हैं।
इसके साथ ही उन्होंने ड्यूटी पर तैनात स्वास्थ्य कर्मियों को संक्रमण से बचाव के लिए खुद भी आवश्यक सावधानी बरतने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी चिकित्साकर्मी तय स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर और हेल्थ प्रोटोकॉल का पालन करते हुए मरीजों का इलाज करें।
महानिदेशक ने जोर देकर कहा कि बीमारियों के फैलाव को रोकने के लिए समयबद्ध निगरानी, त्वरित उपचार, प्रभावी सर्विलांस और जन जागरूकता सबसे जरूरी हैं। उन्होंने अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में स्थिति पर नजर रखते हुए तुरंत कदम उठाने के आदेश दिए।
विभागीय निर्देशों के साथ महानिदेशक ने आम जनता से भी सतर्क रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति में बीमारी के शुरुआती लक्षण दिखाई दें, तो वे तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर की सलाह लें और खुद से दवा लेने से बचें।
उच्चस्तरीय बैठक में स्वास्थ्य विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जिनमें निदेशक डॉ. शिखा जंगपांगी, संयुक्त निदेशक डॉ. प्रीति पंत, अपर निदेशक डॉ. मनु जैन, संयुक्त निदेशक डॉ. वीपी सिंह, सहायक निदेशक डॉ. पंकज कुमार सिंह और सहायक निदेशक डॉ. जितेंद्र जोशी शामिल थे। स्वास्थ्य महानिदेशक के इन सख्त निर्देशों के बाद पूरे उत्तराखंड में जिला स्तरीय चिकित्सा तंत्र सक्रिय हो गया है। अस्पतालों में दवाओं और आवश्यक संसाधनों की समीक्षा तेज कर दी गई है।




