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उत्तराखंड

दून अस्पताल में बच्चा बदलने का आरोप! पर्चे पर लिखा ‘बेटा’, परिजनों को थमाई ‘बेटी’

देहरादून। दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के गायनी विभाग के ऑपरेशन थिएटर में नवजात शिशु बदलने का गंभीर आरोप लगा है। परिजनों को दिए गए मेडिकल पर्चे पर ‘बेटा’ दर्ज किया गया था, जबकि उन्हें ‘बेटी’ सौंपी गई। इस घटना से आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगामा किया और मामले की डीएनए जांच कराने की मांग की। पुलिस प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

मूल रूप से नगीना के निवासी और वर्तमान में देहरादून के प्रेमनगर में रह रहे सुमित ने बताया कि उनकी 34 वर्षीया पत्नी की 24 अगस्त की रात सिजेरियन डिलीवरी हुई थी। आरोप है कि डिलीवरी के समय पति को ओटी में नहीं जाने दिया गया और जन्म के तुरंत बाद मां को भी बच्चा नहीं दिखाया गया।

पीड़ित पिता के अनुसार, बाद में जब मेडिकल डिटेल पेपर थमाया गया तो उसमें स्पष्ट रूप से ‘पुत्र’ लिखा था, लेकिन जब बच्चा दिया गया तो वह ‘पुत्री’ निकली। विरोध जताने पर ड्यूटी स्टाफ पर अभद्रता का आरोप लगा है। परिजनों ने अब पूरे मामले में एफआईआर दर्ज करने, ओटी के सीसीटीवी फुटेज और प्रसव रजिस्टर जब्त करने के साथ डीएनए टेस्ट कराने की लिखित शिकायत पुलिस को दी है।

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घटना का एक कथित वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में एक डॉक्टर यह मानती दिख रही हैं कि वे ओटी में नहीं थीं और उन्होंने डिलीवरी नहीं देखी, उन्हें लगा कि बच्चा मेल है, इसलिए गलती से लिख दिया। डॉक्टर वीडियो में इसे तूल न देने की बात कह रही हैं, जबकि परिजन डीएनए जांच पर अड़े हुए हैं।

मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए सीएमओ डॉ. मनोज शर्मा ने बताया कि ऐसे प्रकरणों में कानूनी प्रक्रिया के तहत पहले पुलिस केस दर्ज होना जरूरी है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज और अस्पताल के दस्तावेजों की जांच कर रिपोर्ट कोर्ट में सौंपेगी। कोर्ट का आदेश मिलने के बाद ही डीएनए जांच आगे बढ़ सकेगी।

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दूसरी तरफ, अस्पताल प्रशासन ने बच्चा बदलने के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। अस्पताल के एमएस डॉ. आरएस बिष्ट का कहना है कि ओटी में उस समय कोई दूसरी डिलीवरी नहीं हुई थी। गायनी और एनेस्थीसिया के डॉक्टरों के नोट्स में ‘बेटी’ ही दर्ज है और प्रसव के तुरंत बाद मां को बच्ची दिखाई भी गई थी।

अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक, भर्ती फाइल तैयार करते समय पीडिया विभाग की इंटर्न से लिपिकीय त्रुटि के कारण ‘बेटा’ दर्ज हो गया था, जिसे बाद में सुधार दिया गया। फिलहाल पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रशासन की जांच रिपोर्ट के बाद ही पूरे मामले की सच्चाई सामने आ पाएगी।

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