उत्तराखंड
केदारताल समेत 4 अति संवेदनशील झीलों का होगा अध्ययन, अर्ली वार्निंग सिस्टम की तैयारी
देहरादून। उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में स्थित खतरनाक हिमनद झीलों की निगरानी और अध्ययन अब केंद्रीय जल आयोग भी करेगा। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के साथ मिलकर और वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान की संयुक्त टीमें इन झीलों का वैज्ञानिक अध्ययन करेंगी। इस कदम से झीलों से पैदा होने वाले खतरों का समय रहते पता लगाया जा सकेगा।
जलवायु परिवर्तन के कारण उच्च हिमालयी क्षेत्रों में हिमनद झीलों का आकार लगातार बढ़ रहा है। झीलों में पानी बढ़ने से प्राकृतिक रूप से बने ‘मोरेन डैम’ के टूटने का जोखिम बढ़ जाता है। ऐसे में अचानक बांध टूटने पर निचले इलाकों में अचानक भीषण बाढ़ आने का खतरा बना रहता है।
उत्तराखंड में ऐसी करीब 344 हिमनद झीलें मौजूद हैं। इनसे पैदा होने वाले खतरों को देखते हुए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सहयोग से ‘ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड जोखिम न्यूनीकरण कार्यक्रम’ शुरू किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य जोखिम को पहचानकर समय रहते बचाव के उपाय करना है।
यूएसडीएमए के सहयोग से वाडिया संस्थान और अन्य विशेषज्ञ टीमों ने पहले चरण में 13 अति संवेदनशील झीलों का अध्ययन पूरा कर लिया है। अब इन इलाकों में अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाने का काम चल रहा है, ताकि किसी भी खतरे की स्थिति में निचले इलाकों को तुरंत सतर्क किया जा सके।
झीलों के अध्ययन और चेतावनी प्रणाली विकसित करने के लिए वाडिया संस्थान को नोडल एजेंसी बनाया गया है और इसके लिए 8 करोड़ रुपये की राशि दी गई है। वाडिया संस्थान के निदेशक विनीत गहलोत के अनुसार, इस पूरे मिशन में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाइड्रोलॉजी समेत अन्य संस्थानों की भी अलग-अलग भूमिकाएं तय की गई हैं।
इस योजना के तहत झीलों की लगातार निगरानी के लिए एक ‘स्थायी हिमानी झील निगरानी केंद्र’ बनाया जाएगा। इसके अलावा, यूएसडीएमए ने वर्ष 2027 तक डाउनस्ट्रीम इलाकों में सायरन आधारित चेतावनी यंत्र और अलर्ट प्रसारण प्रणाली स्थापित करने का बड़ा लक्ष्य रखा है।
बीते दो वर्षों में चमोली जिले की वसुंधरा झील और पिथौरागढ़ की मांबांग, स्यूतियांकित तथा प्युगुरू झीलों का वैज्ञानिक अध्ययन पूरा किया जा चुका है। इस दौरान वैज्ञानिकों ने झीलों की गहराई, जल क्षमता, पानी की निकासी और आसपास की भूगर्भीय स्थितियों की सटीक रिपोर्ट तैयार की है।
आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि इस वर्ष केदारताल समेत चार प्रमुख हिमनद झीलों के अध्ययन की योजना है। उच्च हिमालयी क्षेत्रों में मौसम की परिस्थितियां काफी कठिन होती हैं, इसलिए मौसम के अनुकूल होते ही इन चारों झीलों का वैज्ञानिक अध्ययन और सर्वेक्षण शुरू कर दिया जाएगा।




