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उत्तराखंड

दून अस्पताल के PICU वॉर्ड में ब्लैकआउट: पावर बैकअप फेल, 10 मासूमों की अटकीं सांसें

देहरादून। दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के पीडियाट्रिक आईसीयू यानी पीकू वॉर्ड में गुरुवार देर रात अचानक बिजली आपूर्ति ठप होने और पावर बैकअप फेल होने से हड़कंप मच गया। इस गंभीर लापरवाही के चलते वार्ड में भर्ती 10 मासूम बच्चों की जान खतरे में पड़ गई। घटना की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल और स्वास्थ्य सचिव विनय शंकर पांडेय ने अस्पताल का निरीक्षण किया तथा स्वास्थ्य निदेशक से तुरंत विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।

गुरुवार रात करीब 11:15 बजे दून अस्पताल की ओटी इमरजेंसी बिल्डिंग में अचानक बिजली गुल हो गई। मुख्य जनरेटर का पैनल हैंग होने और 20 किलोवाट क्षमता वाले यूपीएस पर अधिक लोड होने से पावर बैकअप बंद हो गया। उस समय पीकू में भर्ती 10 में से सात बच्चे ऑक्सीजन पर थे और तीन मासूम पूरी तरह लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर थे। बिजली जाते ही वेंटिलेटर की बैटरियों ने भी जवाब दे दिया।

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अंधेरा छाते ही बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार और आईसीयू प्रभारी डॉ. ए.के. सिंह की टीम मौके पर पहुंची। डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने लगभग 15 मिनट तक एंबू बैग के सहारे बच्चों की सांसें बचाए रखीं। जांच में सामने आया कि वेंटिलेटर की बैटरियां एक साल से खराब थीं। विभाग द्वारा यूपीएस की जांच और मरम्मत के लिए एक साल में चार पत्र भेजे जाने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों ने इसे दरकिनार कर दिया था।

स्वास्थ्य निदेशक डॉ. आशुतोष सयाना ने प्राचार्य और चिकित्सा अधीक्षक से जवाब-तलब किया है। जांच में अस्पताल प्रशासन और डॉक्टरों के बीच आपसी समन्वय की भारी कमी पाई गई है। निदेशक ने स्पष्ट किया कि कोई भी अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकता। प्राचार्य, एमएस और सभी एचओडी की सामूहिक जवाबदेही तय की जाएगी। भविष्य में ऐसी घटना रोकने के लिए नई एसओपी तैयार की जा रही है।

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चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आर.एस. बिष्ट ने मामले में स्पष्टीकरण देते हुए बताया कि बिजली आपूर्ति करीब 10 मिनट तक बाधित रही थी। इस दौरान बैटरियों की क्षमता कम होने से समस्या पैदा हुई। एमएस के अनुसार वेंटिलेटर की बैटरियों को तत्काल बदलवाया जा रहा है। इसके साथ ही यूपीएस की क्षमता और लोड बढ़ाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

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