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आबकारी नियमों को ठेंगा! कुल्हाल और डांडा लखौंड के शराब ठेकों पर सरेआम ‘ओवर रेटिंग’ का खेल

देहरादून में कुछ शराब के ठेके अपने आपको आबकारी महकमे से बड़ा समझने लगे हैं। महकमे के काएदे कानूनों को ठेंगा दिखाना उनका आए दिन का काम हो गया है। कोई ऐसा दिन नहीं जब शराब के उन बदनाम ठेकों में शराब के शौकीनों और शराब के ठेकेदार या उनके सेल्समैन के बीच तू-तू मैं-मैं न हो। शराब खरीदने वालों को शिकायत है कि विभाग के तय दाम से ऊपर ठेकों में शराब बिक रही है।

ओवर रेट दाम पर शराब बेचने के लिए सबसे ज्यादा बदनाम कुल्हाल और डांडा लखौंड की अंग्रेजी मदिरा की दुकान है। देहरादून की इन दोनो दुकानों में ग्राहकों की रोज यही शिकायत है कि यहां शराब तय दाम से ज्यादा पर बेची जाती है। विऱोध करो तो ठेकेदार या उसके आदमी तू-तड़ाक पर उतर जाते हैं। कभी कभी तो इतनी हद हो जाती है कि ग्रुप बनाकर ग्राहक के साथ बदतमीजी और हाथ छोड़ने पर उतारू हो जाते हैं, ऐसे में बेचारा शराब का शौकीन क्या करे।

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हालांकि कुछ शराब के खरीददार तो बात बढ़ाने में दिलचस्पी नहीं रखते और जो ठेके वाले ने कह दिया वहीं दाम चुका देते हैं। लेकिन कुछ ग्राहकों को ओवर रेट पर शराब खरीदनी अखरती है तो वो इस नजायज हरकत का विरोध करते हैं। ठेके वालों को ग्राहक का आईना दिखाना न तो कुल्हाल में मौजूद अंग्रेजी शराब की दुकान वालों को पसंद है और न डांडा लखौंड के में मौजूद शराब की दुकान को।

ग्राहक ओवर रेट पर सवाल करता है तो जवाब मिलता है, लेनी है तो लो, वरना दफा हो जाओ या आगे का रास्ता नाप लो, सस्ती वाली दुकान पर जाओ जैसे डायलॉग डिलीवर होते हैं। ग्राहक को ओवर रेट दारू बेचना मानो इन दोनो जगहों पर आवंटित शराब के ठेकेदारों का धर्म बन गया हो।

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सरकारी तय रेट पर ग्राहक को अंग्रेजी शराब मुहैया करवाना कुल्हाल और डांडा लखौंड की अंग्रेजी शराब के दुकानदार को तौहीन लगती है। भारत मे शराब का सेवन विदेशो की तरह जिंदगी और समाज का खुला हिस्सा तो है नहीं कि तंज न हों। लिहाजा चोरी-छिपे शराब पीने वाले ग्राहक मजबूर हैं जिसका फायाद कुल्हाल वाली अंग्रेजी शराब की दुकान भी उठा रही है और डाडा लखौंड वाली दुकान भी।

आबकारी महकमें को शायद या तो इनकी मनमर्जी की खबर नहीं और खबर है तो कोई एक्शन नहीं लिहजा दोनो दुकानों में शराब के ठेके ग्राहक की जेब कुतर रहे हैं। जरूरत है इन पर नकेल कसने की ताकि आबकारी महकमे पर सांठ-गांठ या अनदेखी की तोहमत न लगे और शराब में सुकून ढूढने वाले ग्राहक का मूड पीने से पहले भी मस्त रहे और पीने के बाद भी।

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