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उत्तराखंड की मातृशक्ति प्रेरणा: पिता की टैक्सी चलाकर बेटी ने संभाला परिवार

उत्तराखंड पहाड़ी राज्य है, कभी फुर्सत मिले तो इसे करीब से देखना बेशक आज इसके जिस्म पर पलायन का घाव है जिससे लहू लगातार रिस रहा है लेकिन अब भी मांतृशक्ति हैं जिन्होने अपनी पीठ पर पहाड़ को लाद रखा है। वो इसे दुलार रही हैं पुचकार रही हैं हौंसला दे रही है उम्मीद के दिए जला रही हैं। नौजवान गांव की पगडंडियों से उतर कर महानगर की ओर चला गया है तो उन्होने अपने खेतो को अबाद कर दिया है। बैल खरीद लिए गए हैं तो किसी ने हाथ वाले ट्रैक्टर से अपने खेतों पर भरोसा जताया है। इतना ही नही कुछ बेटियां तो बेटों से भी दो कदम आगे हैं।

नेहा रावत जैसी महिला तो टेक्सी चालन में उतर कर नई लड़कियों की रोल मॉडल बन गई है। वहीं पौड़ी जिले के गिवाली गांव की सानिया राणा ने भी अपने पापा की टैक्सी सड़क पर उतार दी है। पोखडा विकासखंड की सानिया नई इबारत लिख रही है। दरअसल सानिया के पापा टैक्सी चालक थे..अब दुनिया में नहीं रहे। हां, पिता कमलेश राणा ने अपने जीते जी अपनी बिटिया को कार चलाना सिखा दिया था।

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आज पापा का सिखाया हुनर सानिया के काम आ रहा है। पिता ने असमय अलविदा कहा तो बिटिया सानिया ने खुद को संभाला। न खुद टूटी न परिवार को घुटने के बल बैठने दिया.आज सानिया पिता की टैक्सी को चलाकर परिवार के लिए रोजी-रोटी जुटा रही है तो समाज में अपनी पहचान भी बना रही है। सानिया साबित कर रही है कि अग बेटी पर भरोसा करो तो वो बेटों से कम नहीं होती। शाबास सानिया शाबास हमे तुम पर गर्व है. तुम्हारे हौसले को समाचार 4 U का सलाम और शुभकामनाएं। उत्तराखंड पहाड़ी राज्य है, कभी फुर्सत मिले तो इसे करीब से देखना बेशक आज इसके जिस्म पर पलायन का घाव है जिससे लहू लगातार रिस रहा है लेकिन अब भी मांतृशक्ति हैं जिन्होने अपनी पीठ पर पहाड़ को लाद रखा है। वो इसे दुलार रही हैं पुचकार रही हैं हौंसला दे रही है उम्मीद के दिए जला रही हैं।

नौजवान गांव की पगडंडियों से उतर कर महानगर की ओर चला गया है तो उन्होने अपने खेतो को अबाद कर दिया है। बैल खरीद लिए गए हैं तो किसी ने हाथ वाले ट्रैक्टर से अपने खेतों पर भरोसा जताया है। इतना ही नही कुछ बेटियां तो बेटों से भी दो कदम आगे हैं। नेहा रावत जैसी महिला तो टेक्सी चालन में उतर कर नई लड़कियों की रोल मॉडल बन गई है। वहीं पौड़ी जिले के गिवाली गांव की सानिया राणा ने भी अपने पापा की टैक्सी सड़क पर उतार दी है। पोखडा विकासखंड की सानिया नई इबारत लिख रही है। दरअसल सानिया के पापा टैक्सी चालक थे..अब दुनिया में नहीं रहे। हां, पिता कमलेश राणा ने अपने जीते जी अपनी बिटिया को कार चलाना सिखा दिया था।

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आज पापा का सिखाया हुनर सानिया के काम आ रहा है। पिता ने असमय अलविदा कहा तो बिटिया सानिया ने खुद को संभाला। न खुद टूटी न परिवार को घुटने के बल बैठने दिया.आज सानिया पिता की टैक्सी को चलाकर परिवार के लिए रोजी-रोटी जुटा रही है तो समाज में अपनी पहचान भी बना रही है। सानिया साबित कर रही है कि अग बेटी पर भरोसा करो तो वो बेटों से कम नहीं होती। शाबास सानिया शाबास हमे तुम पर गर्व है. तुम्हारे हौसले को समाचार 4 U का सलाम और शुभकामनाएं।

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