Connect with us

उत्तराखंड

नशा नेटवर्क: शाहरुख उर्फ शिवम गुप्ता के राजनीतिक कनेक्शन और वित्तीय लेनदेन पर उठे सवाल

नशे के काले कारोबार की जड़ें सिर्फ चंद तस्करों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इसके तार पड़ोसी राज्य से लेकर कई रसूखदार परिवारों तक फैले होने की चर्चा है। इन दिनों नशे के इस पूरे नेटवर्क में एक नाम प्रमुखता से सामने आ रहा है—शाहरुख उर्फ शिवम गुप्ता उर्फ साहिल। बताया जा रहा है कि पड़ोसी राज्य का रहने वाला यह शख्स उत्तराखंड सहित अन्य राज्यों में भी अपना जाल बिछाने की कोशिश कर रहा है।

सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इस संदिग्ध नेटवर्क को किसका संरक्षण हासिल है? चर्चाएं हैं कि शाहरुख के तार कुछ प्रभावशाली रसूखदार नेताओं और उनके परिजनों से जुड़े हैं। हालांकि इन दावों की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच होना अभी बाकी है, लेकिन नशे के सौदागरों की बड़े घरानों तक कथित पहुंच ने पुलिस प्रशासन की मुस्तैदी पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

यह भी पढ़ें 👉  उत्तराखंड के 7 शहरों में सीवर नेटवर्क पस्त, ऋषिकेश और हरिद्वार में भी हालात चिंताजनक

शाहरुख का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड भी इस पूरे मामले को संदिग्ध बनाता है। सूत्रों के मुताबिक, वर्ष 2020-21 के दौरान भी अपने कथित अवैध कारनामों के चलते शाहरुख जेल की सलाखों के पीछे जा चुका है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि पहले शिकंजा कसने के बावजूद यह नेटवर्क दोबारा किन परिस्थितियों में और किसकी शह पर सक्रिय हुआ?

इस मामले में वित्तीय लेनदेन की परतें भी खुलती दिख रही हैं। सूत्रों के हवाले से खबर है कि हाल ही में एक प्रभावशाली नेता के पुत्र के जरिए शाहरुख को लाखों रुपये का लेनदेन किया गया है। जैसे ही इस भारी भरकम लेनदेन की भनक संबंधित नेता तक पहुंची, राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई। अब यह तो निष्पक्ष जांच और बैंकिंग रिकॉर्ड की पड़ताल से ही साफ होगा कि यह रकम किसी सामान्य कारोबार के लिए दी गई थी या इसके पीछे नशे के कारोबार की कोई गहरी साजिश है।

यह भी पढ़ें 👉  हल्द्वानी में STF की बड़ी कार्रवाई, डार्क वेब और AI से अश्लील वीडियो बनाने वाला नाबालिक गिरफ्तार

मामले में नया मोड़ तब आया जब नेता के इर्द-गिर्द रहने वाले एक व्यक्ति का नाम शाहरुख के करीबी मोबाइल कारोबारी से जुड़ता दिखा। बताया जाता है कि नेता का यह करीबी पहले ही एक महिला से छेड़छाड़ के मामले में जेल जा चुका है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि संदिग्ध पृष्ठभूमि वाले इन लोगों को आखिर किसका राजनीतिक रसूख बचा रहा है? नशे के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति के बीच, क्या जांच की आंच इन रसूखदार चेहरों तक पहुंचेगी?

More in उत्तराखंड

Ad Ad Ad

Trending News

Follow Facebook Page