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उत्तराखंड

उत्तराखंड में कैबिनेट विस्तार की अटकलें: 2027 चुनाव से पहले भाजपा लॉबिंग तेज, कांग्रेस ने कवायद दिया करार

उत्तराखंड में सत्तासीन धामी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर सियासी चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालात ऐसे हैं कि अब खुद सत्ताधारी दल के विधायक भी कैबिनेट विस्तार को लेकर दावे करने लगे हैं। वहीं विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार पर निशाना साध रहा है। सवाल यही है कि क्या वाकई मंत्रिमंडल का विस्तार होगा या फिर यह चर्चा भी सिर्फ सियासी बयानबाजी बनकर रह जाएगी।


उत्तराखंड मे साल 2012 से लेकर वर्तमान समय तक जितनी भी सरकारें सत्ता में आई, उनमें से किसी भी सरकार का मंत्री मंडल कभी पूर्ण रुप से नहीं भर पाया। विजय बहुगुणा सरकार से लेकर हरीश रावत, त्रिवेंद्र सिंह रावत और मौजूदा धामी सरकार तक हर शासनकाल में मंत्रिमंडल विस्तार अधूरा ही रहा। वहीं अब 2027 विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहा है तो उत्तराखंड में भाजपा के कई विधायक मंत्री पद की उम्मीद बांधे बैठे हैं और संगठन के भीतर लॉबिंग भी खासा तेज हो चुकी है। हालांकि, मौजूदा वक्त में धामी सरकार के मंत्रिमंडल में कुल पांच मंत्री पद रिक्त हैं और काफी लंबे समय से इन पदों को भरने की मांग भी उठती आ रही है। वहीं कई बार संगठन और मुख्यमंत्री की ओर से विस्तार के संकेत भी दिए गए, लेकिन अब तक कोई अंतिम फैसला नहीं हो पाया है, यही वजह है कि मंत्रिमंडल विस्तार उत्तराखंड की राजनीति में अब भी एक बड़ा सवाल बना हुआ है।

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कैबिनेट विस्तार हुआ कवायद करार


कैबिनेट विस्तार को लेकर भाजपा विधायकों की उम्मीद अभी भी बनी हुई है। जागेश्वर से भाजपा विधायक मोहन सिंह माहरा का कहना है कि इस बार मंत्रिमंडल विस्तार होने की संभावना है, हालांकि उनका मानना है कि सरकार का कार्यकाल अब सीमित समय का बचा है। वहीं कांग्रेस ने मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाओं को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुजाता पॉल का कहना है कि सरकार ने पूरे कार्यकाल में प्रदेश की जनता को सिर्फ आश्वासन दिए हैं और अब चुनाव नजदीक आते ही कैबिनेट विस्तार की बातें सामने लाई जा रही हैं। उनका आरोप है कि यह कवायद शासन सुधार के लिए नहीं, बल्कि सत्ताधारी दल के भीतर असंतोष को संभालने के लिए की जा रही है।

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धामी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर अब तक तकनीकी कारणों और राष्ट्रीय नेतृत्व के फैसले का हवाला दिया जाता रहा है। लेकिन राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव के बाद एक बार फिर अटकलें तेज हो गई हैं कि हाईकमान की हरी झंडी मिलते ही मंत्रिमंडल का विस्तार किया जा सकता है। अब देखना होगा कि अगर मंत्रिमंडल विस्तार होता है तो पांच रिक्त मंत्री पदों पर युवा चेहरों को मौका मिलता है या फिर चुनावी समीकरणों को देखते हुए अनुभवी विधायकों पर भरोसा जताया जाता है।

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