उत्तराखंड
रुड़की में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा सोलानी फ्लाईओवर: 4 साल में 3 बार धंसी सड़क,1000 करोड़ का प्रोजेक्ट फेल
उत्तराखंड में एक ओर जहां सरकार नई विकास परियोजनाओं का शिलान्याल कर रही है तो वहीं दूसरी ओर राज्य में क्रियान्वित परियोजनाएं और चलायमान व्यवस्था की रीढ़ स्वंय टेढ़ी हुई पड़ी है। इन्हीं में से एक है सड़क पर गहरे गढ्ढे, आलम यह है कि गढ्ढों में थोड़ी सी सड़क शेष बची है और आय दिन यातायात के दौरान यह गढ्ढे सड़क दुर्घटना का सबब बन रहे हैं। इसी से जुड़ा एक मामला रुड़की से सामने आया है, जहां रुड़की के अब्दुल कलाम चौक से कोर कॉलेज बाईपास की ओर जाने वाला सोलानी पुल एक बार फिर सुर्खियों में है। वजह कोई विकास कार्य नहीं, बल्कि पुल की छाती पर धंसा एक जानलेवा गढ्ढा है जो सिस्टम और भ्रष्टाचार की पोल खोल रहा है।
बता दें कि यह वही फ्लाईओवर है, जिसे NHAI ने मुजफ्फरनगर–हरिद्वार–देहरादून हाईवे प्रोजेक्ट के तहत बनवाया गया था। तकरीबन ₹1000 करोड़ की लागत वाला यह प्रोजेक्ट 2021 के कुंभ मेले से पहले आनन-फानन में शुरू किया गया, अब तय मानकों के मुताबिक ऐसे फ्लाईओवर की उम्र कमसकम 20–25 साल होनी चाहिए, लेकिन हैरानी की बात यह है कि महज 4 साल में यह सड़क तीसरी बार धंस चुकी है।
प्रशासन की नियत पर उठे सवाल
वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि गड्ढा सड़क में नहीं, बल्कि सिस्टम की नीयत में है। अगर निर्माण गुणवत्ता सही होती और इंजीनियरों की निगरानी ईमानदार होती, तो बार-बार मरम्मत की नौबत ही नहीं आती। हर बार की तरह इस बार भी प्रशासन ने बैरिकेडिंग और ट्रैफिक डायवर्जन कर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। सवाल यह है कि घटिया निर्माण को पास करने वाले NHAI के इंजीनियरों पर कार्रवाई कब होगी? क्या जिम्मेदार कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा? नियम साफ हैं :- अगर 5 साल के भीतर सड़क खराब होती है, तो ठेकेदार को अपने खर्चे पर दोबारा निर्माण करना होता है। लेकिन सजा आज भी जनता भुगत रही है। अब देखना यह है कि प्रशासन इसे फिर ‘तकनीकी खराबी’ बताकर दबा देता है या दोषियों पर कार्रवाई कर जनता का भरोसा बचाता है।





