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उत्तराखंड

बद्रीनाथ धाम की परंपराओं पर सवाल, रावल पद के नियमों की समीक्षा की मांग

बद्रीनाथ धाम की परंपराओं और रावल पद से जुड़े नियमों को लेकर नई बहस छिड़ गई है। धार्मिक मान्यताओं, ब्रह्मचर्य नियमों और मंदिर प्रशासन की व्यवस्थाओं पर सवाल उठ रहे हैं। निम्रे धार्मिक केंद्रीय पंचायत के अध्यक्ष आशुतोष डिमरी ने कहा कि बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम में रावल की भूमिका अलग-अलग तरीके से निभाई जाती है। केदारनाथ के रावल जहां प्रतिदिन की पूजा में सीधे शामिल नहीं होते, वहीं बद्रीनाथ धाम में रावल रोजाना पूजा-अर्चना में सक्रिय भूमिका निभाते हैं।

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आशुतोष डिमरी ने स्पष्ट किया कि बद्रीनाथ मंदिर के गर्भगृह में केवल रावल और डिमरी पुजारियों को ही प्रवेश की अनुमति है, जो सदियों पुरानी परंपरा है। रावल पद के लिए ब्रह्मचर्य को अनिवार्य बताते हुए उन्होंने कहा कि यदि इस विषय पर कोई विवाद सामने आता है, तो मंदिर समिति को नियमों और कानूनों के अनुसार विचार करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि इस मुद्दे पर धर्माचार्यों और विशेषज्ञों द्वारा पहले ही स्पष्ट व्याख्या दी जा चुकी है, जिस पर आगे निर्णय लिया जाना चाहिए।

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