उत्तरकाशी
उत्तराखंड में फिर डोली धरती: उत्तरकाशी में आया भूकंप, हल्के झटकों से इलाके में फैली दहशत
उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले और आसपास के इलाकों में सोमवार रात करीब 10:05 बजे भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए, जिससे स्थानीय लोग दहशत में आ गए और अपने घरों से बाहर निकल आए। यह घटना तब हुई जब ज्यादातर लोग रात के समय सोने की तैयारी कर रहे थे। अचानक धरती कांपने लगी तो पुराने लोग 1991 के विनाशकारी भूकंप की भयावह यादें ताजा कर उठे, जब उत्तरकाशी में भारी तबाही मची थी और सैकड़ों जानें गई थीं। खुशी की बात यह है कि अभी तक इस भूकंप में जान-माल के किसी नुकसान की कोई खबर नहीं आई है, लेकिन इसने क्षेत्र में भूकंप preparedness और सुरक्षा उपायों की जरूरत को फिर से सामने ला दिया है।
उत्तरकाशी, जो हिमालय की गोद में बसा एक संवेदनशील भूकंपीय क्षेत्र है, पहले भी कई बार ऐसे झटकों का शिकार हो चुका है। 1991 का भूकंप यहां का सबसे घातक था, जिसमें 6.8 तीव्रता के हिलोरों ने हजारों घरों को नेस्तनाबूद कर दिया था। सोमवार रात के झटके भले ही हल्के थे, लेकिन लोगों में व्याप्त डर ने प्रशासन को अलर्ट मोड में ला दिया। जिला प्रशासन ने तुरंत राहत और बचाव टीमों को तैयार रखा, जबकि एनडीआरएफ की टीमें भी स्टैंडबाई पर हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तराखंड टेक्टॉनिक प्लेट्स की सीमा पर स्थित होने से ऐसे झटके सामान्य हैं, लेकिन नियमित जागरूकता अभियान और मजबूत इमारतें ही असली सुरक्षा का आधार हैं।
इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर लोग अपनी अनुभव साझा कर रहे हैं, जहां कई ने बताया कि झटके 5-10 सेकंड तक चले। ग्रामीण क्षेत्रों में जहां घर कच्चे-पक्के हैं, वहां खतरा ज्यादा है। सरकार को चाहिए कि अब भूकंप रोधी निर्माण को अनिवार्य बनाए और लोगों को ‘ड्रॉप, कवर एंड होल्ड ऑन’ जैसे तरीकों की ट्रेनिंग दे। उत्तरकाशी जैसे पहाड़ी जिलों में आपदा प्रबंधन को मजबूत करने का यह सही समय है, ताकि भविष्य में कोई बड़ा हादसा न हो। फिलहाल स्थिति सामान्य है, लेकिन सतर्कता बरतना जरूरी।
13 जनवरी को 3.5 तीव्रता के हल्के झटकों ने फैलाई दहशत
बागेश्वर जनपद में इस वर्ष 13 जनवरी को सुबह भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए, जिसकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 3.5 मापी गई। भूकंप का केंद्र बागेश्वर क्षेत्र में 29.93 डिग्री उत्तरी अक्षांश एवं 80.07 डिग्री पूर्वी देशांतर पर 10 किलोमीटर गहराई में स्थित था। झटके महसूस होते ही लोग दहशत में अपने घरों से बाहर निकल आए। उत्तराखंड जैसे हिमालयी राज्य में भूकंपीय गतिविधियां आम हैं, लेकिन यह घटना सुरक्षा जागरूकता की याद दिलाती है।





