उत्तराखंड
उत्तराखंड में नदियों का जलस्तर घटने से बिजली की भारी किल्लत, ग्रामीण इलाकों में बत्ती गुल
देहरादून। उत्तराखंड में बिजली की भारी किल्लत लगातार बरकरार है और जलविद्युत परियोजनाओं में उत्पादन तेजी से घटने के कारण आम जनता को कटौती का सामना करना पड़ रहा है। ऊर्जा निगम के आंकड़ों के अनुसार, महज 12 दिनों के भीतर राज्य के अपने बिजली उत्पादन में 34 प्रतिशत की बड़ी गिरावट आई है, जिससे यूपीसीएल प्रबंधन को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। बाजार से महंगी बिजली खरीदने और बैंकिंग प्रणाली का सहारा लेने के बावजूद राज्य की कुल मांग के सापेक्ष पर्याप्त बिजली उपलब्ध नहीं हो पा रही है।
बिजली उत्पादन में आई इस अचानक गिरावट की मुख्य वजह पर्वतीय क्षेत्रों में नदियों के जलस्तर में आ रही कमी को माना जा रहा है। जल स्तर घटने से जलविद्युत परियोजनाओं से होने वाला उत्पादन काफी घट गया है, जिससे राज्य में ऊर्जा संकट की स्थिति पैदा हो गई है। नदियों का प्रवाह कम होने से आने वाले दिनों में भी बिजली आपूर्ति को लेकर चिंता बनी हुई है।
आंकड़ों पर नजर डालें तो अक्टूबर की शुरुआत में उत्तराखंड के अपने जलविद्युत स्रोतों से प्रतिदिन लगभग 2.38 करोड़ यूनिट बिजली का उत्पादन हो रहा था। हालांकि, 12 अक्टूबर तक यह उत्पादन घटकर महज 1.57 करोड़ यूनिट रोजाना रह गया है। इसके विपरीत, राज्य में प्रतिदिन बिजली की कुल मांग 4 करोड़ से 4.8 करोड़ यूनिट के बीच बनी हुई है, जिससे मांग और आपूर्ति के बीच बड़ा अंतर आ गया है।
उत्पादन में आई इस कमी को पूरा करने के लिए ऊर्जा निगम को केंद्रीय कोटे और खुले बाजार पर निर्भर रहना पड़ रहा है। एक से सात अक्टूबर के दौरान जब औसत मांग 4.5 से 4.8 करोड़ यूनिट के स्तर पर थी, तब राज्य का अपना उत्पादन 1 अक्टूबर को 2.3 करोड़ यूनिट था जो 12 अक्टूबर को गिरकर 1.5 करोड़ यूनिट पहुंच गया। नतीजतन, ऊर्जा निगम को खुले बाजार से महंगी दरों पर बिजली खरीदकर स्थिति को संभालने का प्रयास करना पड़ रहा है।
बिजली की उपलब्धता में आई इस कमी का सीधा असर राज्य के विभिन्न जिलों में बिजली कटौती के रूप में देखने को मिल रहा है। उदाहरण के तौर पर, 12 अक्टूबर को प्रदेश में बिजली की कुल मांग 4 करोड़ यूनिट दर्ज की गई थी। इस मांग के मुकाबले राज्य का अपना उत्पादन केवल 1.5 करोड़ यूनिट रहा, जबकि केंद्रीय पूल व वीपी शेयर से 1.7 करोड़ यूनिट बिजली हासिल की गई।
इसके अलावा, बाजार से खरीद और बैंकिंग व्यवस्था के जरिए 60 लाख यूनिट तथा ऊर्जा एक्सचेंज से 12 लाख यूनिट बिजली जुटाने के बाद भी कुल उपलब्धता केवल 3.9 करोड़ यूनिट ही हो सकी। मांग और आपूर्ति के इसी अंतर के कारण 12 अक्टूबर को हरिद्वार क्षेत्र में 1.25 घंटे और ऊधमसिंह नगर के ग्रामीण इलाकों में 1.15 घंटे की बिजली कटौती की गई। ऊर्जा निगम के अधिकारी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और आपूर्ति सामान्य करने के प्रयास किए जा रहे हैं।



