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उत्तराखंड

देहरादून में महा-धोखाधड़ी: NRI से ₹3.51 करोड़ की जमीन की जालसाजी

देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से जमीनी जालसाजी का एक सनसनीखेज और बेहद बड़ा मामला सामने आया है। यहां के नेहरू कॉलोनी थाना क्षेत्र में केदारपुर इलाके की एक जमीन का सौदा कर कनाडा में रहने वाले एक प्रवासी भारतीय से ₹3.51 करोड़ की भारी-भरकम रकम हड़प ली गई। नेहरू कॉलोनी पुलिस ने मंगलवार को इस हाई-प्रोफाइल धोखाधड़ी में बड़ी कार्रवाई करते हुए एक दंपत्ति, उनकी बेटी और बेटे समेत एक ही परिवार के 5 लोगों के खिलाफ संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इस महा-धोखाधड़ी के खुलासे से दून के प्रॉपर्टी बाजार में हड़कंप मच गया है।

पुलिस के मुताबिक, मूल रूप से मसूरी रोड के रहने वाले और वर्तमान में कनाडा में रह रहे एनआरआई विक्रम सिंह गुसाईं ने इस जालसाजी को लेकर नेहरू कॉलोनी थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। पीड़ित का आरोप है कि आरोपियों ने करोड़ों रुपये हड़पने के बावजूद न तो जमीन का बैनामा उनके नाम किया और न ही अब उनके पैसे लौटा रहे हैं।

इस बड़ी धोखाधड़ी के मामले में पुलिस ने जिन आरोपियों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की है, उनमें मुख्य आरोपी गजपाल सिंह, उसकी पत्नी वीरवती देवी, बेटी पूजा चौधरी, बेटा सतवंत सिंह और कौशल्या देवी शामिल हैं। पुलिस ने इन सभी के खिलाफ धोखाधड़ी और जान से मारने की धमकी देने की धाराओं में केस दर्ज किया है।

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दर्ज कराई गई एफआईआर के मुताबिक, कनाडाई प्रवासी विक्रम सिंह गुसाईं ने 2 दिसंबर 2025 को केदारपुर में 750 वर्ग गज जमीन खरीदने के लिए गजपाल सिंह और उसके परिवार के साथ सौदा तय किया था। आरोपियों पर पूरा भरोसा करते हुए पीड़ित एनआरआई ने रजिस्ट्री से पहले ही कुल तय रकम यानी पूरे 3.51 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया।

लेकिन करोड़ों रुपये ऐंठने के बाद आरोपियों की नीयत डोल गई। भुगतान के बाद जब पीड़ित विक्रम सिंह ने अपने निजी सर्वेयर से केदारपुर की उस जमीन की पैमाइश कराई, तो मौके पर बड़ा खेल सामने आया। जिस जमीन को 750 वर्ग गज बताकर बेचा गया था, वह मौके पर सिर्फ 729.67 वर्ग गज ही निकली।

रकबा कम निकलने पर जब पीड़ित ने आपत्ति जताई, तो आरोपी गजपाल सिंह दबंगई पर उतर आया और पुराने हिसाब से ही पूरे पैसे रखने की जिद करने लगा। बाद में, काफी विवाद के बाद 30 जून 2026 को दोनों पक्षों के बीच 745 वर्ग गज जमीन की रजिस्ट्री करने पर एक नया लिखित समझौता हुआ।

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आरोप है कि इस नए समझौते के बाद भी आरोपी परिवार बैनामे के कागजात देने में लगातार टालमटोल करता रहा। बीते 2 जुलाई 2026 को गजपाल सिंह दोपहर के वक्त पीड़ित के बंजारावाला स्थित घर पहुंचा और एक घंटे के भीतर सारे कागजात देने की बात कही, लेकिन जानबूझकर शाम तक कागजात रोके रखे गए।

हद तो तब हो गई जब पीड़ित के वकील ने शाम 4:25 बजे तक सारे स्टाम्प पेपर तैयार कर लिए, लेकिन आरोपी गजपाल ने सब-रजिस्ट्रार कार्यालय आने से साफ मना कर दिया और अगले दिन का बहाना बना दिया। अगले दिन 3 जुलाई 2026 को पीड़ित विक्रम सिंह सुबह से लेकर शाम तक रजिस्ट्री दफ्तर में बैठकर आरोपियों का इंतजार करते रहे, लेकिन जमीन बेचने वाला कोई भी आरोपी वहां नहीं पहुंचा।

लगातार मिल रहे धोखे के बाद आखिरकार 14 जुलाई 2026 को पीड़ित को अहसास हुआ कि उनके साथ बहुत बड़ा लैंड फ्रॉड हो चुका है। इसके बाद जब पीड़ित एनआरआई ने आरोपियों से अपने 3.51 करोड़ रुपये वापस मांगे या जमीन की रजिस्ट्री करने को कहा, तो आरोपियों ने उन्हें सीधे जान से मारने की धमकियां देना शुरू कर दिया, जिसके बाद पीड़ित को पुलिस की शरण लेनी पड़ी।

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