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आज रात पृथ्वी के बेहद करीब से गुजरेगा बड़ा एस्टेरॉयड ‘2026 JH2’, NASA ने जारी किया अलर्ट

अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया से एक बेहद रोमांचक और बड़ी खगोलीय घटना सामने आ रही है, जहाँ अंतरिक्ष की गहराइयों में हाल ही में खोजा गया एक नवनिर्मित एस्टेरॉयड आज रात हमारी पृथ्वी के बेहद करीब से गुजरने वाला है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, ‘2026 जेएच2’ नामक यह एस्टेरॉयड सोमवार यानी 18 मई 2026 को धरती के इतने नजदीक आ जाएगा कि इसकी दूरी पृथ्वी और चंद्रमा के बीच की कुल दूरी की महज एक चौथाई यानी लगभग 25 फीसदी ही रह जाएगी।

हालांकि, आमतौर पर पृथ्वी के पास से गुजरने वाले एस्टेरॉयड लाखों किलोमीटर की दूरी पर होते हैं, लेकिन इस एस्टेरॉयड का इतने करीब आना एक दुर्लभ घटना माना जा रहा है। अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा की जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी के वैज्ञानिकों ने पूरी तरह आश्वस्त किया है कि इस विशाल आकाशीय पिंड से हमारी पृथ्वी को किसी भी प्रकार का कोई खतरा नहीं है और यह बिना टकराए पूरी तरह सुरक्षित रूप से अपनी कक्षा में आगे निकल जाएगा।

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इस अनोखे एस्टेरॉयड के आकार और इसकी खोज के इतिहास पर बात करें तो नासा के अनुमान के मुताबिक इसकी चौड़ाई 15 मीटर से लेकर 35 मीटर (लगभग 50 से 115 फीट) के बीच आंकी गई है, जो किसी अमेरिकी फुटबॉल मैदान के एक-तिहाई हिस्से जितनी विशाल है।

इस खगोलीय पिंड को सबसे पहले 10 मई को एक 60 इंच के बेहद शक्तिशाली टेलिस्कोप की मदद से अंतरिक्ष में देखा गया था, जिसके बाद अमेरिकी वेधशालाओं ने इसकी गति और कक्षा का निरंतर और गहन अध्ययन किया। इस सटीक वैज्ञानिक विश्लेषण के बाद 12 मई को इसे आधिकारिक तौर पर ‘अपोलो एस्टेरॉयड’ की श्रेणी में रखा गया, जो उन विशिष्ट आकाशीय पिंडों को कहा जाता है जो अंतरिक्ष में यात्रा करते हुए अक्सर पृथ्वी की कक्षा को पार करते हैं।

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भारतीय समयानुसार यह एस्टेरॉयड 18 मई 2026 की मध्य रात्रि को पृथ्वी के सबसे करीब होगा, और इस मुख्य समय से करीब तीन घंटे पहले यह चंद्रमा के पास से भी होकर गुजरेगा। पृथ्वी के सबसे पास पहुंचते समय इसकी दूरी मात्र 90,000 किलोमीटर (यानी लगभग 56,000 मील) रह जाएगी, जिसके कारण पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र के करीब आते ही इसकी चमक में भारी इजाफा देखने को मिलेगा।

चूंकि यह आकार में काफी छोटा है, इसलिए इसे केवल नग्न आंखों से देखना संभव नहीं होगा; परंतु खगोलविदों के अनुसार, अंतरिक्ष प्रेमी और आम लोग एक छोटे टेलिस्कोप की मदद से इसे आसानी से देख सकते हैं, जहाँ पृथ्वी के करीब से गुजरने के दौरान यह रात के समय लियो कांस्टेलेशन यानी सिंह तारामंडल के बिल्कुल पास चमकता हुआ दिखाई देगा।

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