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उत्तराखंड में टैक्स विभाग की सख्ती के बाद होटल-रेस्तरां ने सरकारी खजाने में लौटाए ₹7 करोड़

देहरादून। उत्तराखंड राज्य कर विभाग ने फर्जी बिलों के आधार पर इनपुट टैक्स क्रेडिट का अवैध लाभ लेने वाले और जीएसटी जमा न करने वाले होटल व रेस्तरां संचालकों पर बड़ा शिकंजा कसा है। विभाग द्वारा चलाए गए एक विशेष अभियान के तहत जून माह में देहरादून, हरिद्वार और हल्द्वानी की कुल 57 व्यावसायिक फर्मों पर बड़ी कार्रवाई की गई है। इस कड़ी कार्रवाई के बाद इन डिफॉल्टर होटल-रेस्तरां ने सात करोड़ रुपये की आईटीसी राशि सरकारी खजाने में वापस लौटाई है, साथ ही 1.78 करोड़ रुपये नगद भी जमा किए हैं।

यह पूरी कार्रवाई राज्य कर आयुक्त प्रतीक जैन के विशेष दिशानिर्देशों पर राज्य कर मुख्यालय द्वारा अमल में लाई गई है। विभाग के मुख्यालय स्तर पर जब जीएसटी से प्राप्त होने वाले राज्य के राजस्व का गहन डेटा विश्लेषण किया गया, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। इस विश्लेषण में पाया गया कि राज्य के कई नामचीन होटल और रेस्तरां से सरकार को उनके वास्तविक कारोबार के मुकाबले अपेक्षाकृत राजस्व प्राप्त नहीं हो रहा है।

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जीएसटी चोरी करने वाले और फर्जी बिलों के जरिए इनपुट टैक्स क्रेडिट का गलत लाभ लेने वाली फर्मों को चिन्हित कर कर विभाग ने यह विशेष अभियान शुरू किया था। जून महीने में इस कार्रवाई को धरातल पर उतारते हुए देहरादून, हरिद्वार और हल्द्वानी जैसे प्रमुख व्यापारिक केंद्रों में टैक्स चोरी करने वाले कारोबारियों पर एक साथ कानूनी शिकंजा कसा गया।

देहरादून और हरिद्वार-हल्द्वानी में बड़ी रिकवरी

कर विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, सबसे बड़ी कार्रवाई अकेले देहरादून जिले में अमल में लाई गई है। देहरादून जिले की कुल 46 व्यावसायिक फर्मों ने कर विभाग की सख्ती के बाद 5.26 करोड़ रुपये की भारी-भरकम आईटीसी राशि वापस लौटाई है। इसके अतिरिक्त इन देहरादून की फर्मों द्वारा कुल 77 लाख रुपये नगद भी टैक्स के रूप में सरकारी खाते में जमा कराए गए हैं।

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इसके साथ ही, हरिद्वार और हल्द्वानी जिलों में भी समानांतर रूप से यह जांच अभियान चलाया गया। विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, हरिद्वार और हल्द्वानी क्षेत्र की विभिन्न डिफॉल्टर फर्मों ने कर विभाग की कार्रवाई के दबाव में आकर संयुक्त रूप से कुल एक करोड़ रुपये की नगद धनराशि सरकारी कोष में जमा की है।

राज्य कर आयुक्त प्रतीक जैन ने पूरे मामले पर आधिकारिक जानकारी देते हुए टैक्स चोरी करने वालों को सख्त लहजे में चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जीएसटी की चोरी करने वाले और फर्जी बिलों के सहारे आईटीसी का अनुचित लाभ लेने वाली फर्मों के खिलाफ विभाग का यह विशेष दंडात्मक अभियान आगे भी पूरी सख्ती के साथ जारी रहेगा।

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