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उत्तराखंड

AIIMS Rishikesh: अब ओपीडी पर्चे के लिए नहीं लगना होगा लंबी लाइनों में; खुलेगा स्पेशल काउंटर

ऋषिकेश। उत्तराखंड के पहाड़ी और दूरदराज के इलाकों से ऋषिकेश एम्स आने वाले मरीजों के लिए एक बहुत अच्छी खबर है। एम्स प्रशासन ने स्थानीय नागरिकों की सहूलियत के लिए अस्पताल परिसर में एक ‘विशेष काउंटर’ खोलने का निर्णय लिया है। इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद उत्तराखंड के मूल निवासियों को ओपीडी पंजीकरण और डॉक्टर को दिखाने का पर्चा बनवाने के लिए घंटों लंबी कतारों में नहीं जूझना पड़ेगा।

यह बड़ा फैसला एम्स ऋषिकेश की नवनियुक्त निदेशक प्रो. मीनू सिंह और अस्पताल प्रबंधन की हाई-लेवल मीटिंग में लिया गया। इस कदम का सीधा फायदा उत्तराखंड के उन हजारों गरीब और गंभीर मरीजों को मिलेगा, जो रातभर का लंबा सफर तय करके पहाड़ों से यहां इलाज के लिए पहुंचते हैं।

स्थानीय भाषा समझने वाले गाइड होंगे तैनात

एम्स प्रशासन के अनुसार, इस विशेष काउंटर को शुरू करने का असली मकसद पर्वतीय क्षेत्रों के बुजुर्गों और सीधे-साधे मरीजों की मदद करना है। कई बार पहाड़ों से आने वाले मरीज एम्स की ऑनलाइन या डिजिटल रजिस्ट्रेशन प्रणाली को समझ नहीं पाते हैं। इसे देखते हुए काउंटर पर ऐसे कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाएगी, जो स्थानीय गढ़वाली और कुमाऊँनी बोली-भाषा को अच्छी तरह समझते हों।

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यह स्टाफ न केवल मरीजों का तुरंत रजिस्ट्रेशन करेगा, बल्कि उन्हें डॉक्टरों के कमरों और जांच लैब तक पहुंचाने में गाइड भी करेगा। इसके साथ ही, राज्य सरकार की ‘आयुष्मान योजना’ के तहत मिलने वाले मुफ्त इलाज की प्रक्रिया को भी इसी काउंटर से आसान और तेज किया जाएगा।

क्यों पड़ी इस अलग काउंटर की जरूरत? आंकड़े जानिए:

एम्स ऋषिकेश में हर दिन औसतन 8,000 से 10,000 मरीज ओपीडी में आते हैं। उत्तराखंड के अलावा उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, पंजाब और हरियाणा से भी भारी संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं। इस भारी भीड़ के कारण सीमांत जिलों के मरीजों का पूरा दिन सिर्फ पर्चा बनवाने में ही निकल जाता था।

इस विशेष काउंटर की सुविधा का लाभ लेने के लिए उत्तराखंड के मरीजों को एंट्री लेवल पर ही अपना पहचान पत्र दिखाना होगा।

पहाड़ों के मरीजों का समय और पैसा बचाना प्राथमिकता

एम्स ऋषिकेश के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि संस्थान का लक्ष्य सिर्फ विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं देना नहीं, बल्कि इलाज की प्रक्रिया को भी सरल बनाना है। उत्तराखंड के कठिन भौगोलिक हालातों को देखते हुए अस्पताल की यह जिम्मेदारी बनती है कि मरीजों को बिना किसी मानसिक और शारीरिक परेशानी के तुरंत डॉक्टरी सलाह मिल सके।

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इस नए स्पेशल काउंटर को अगले कुछ ही दिनों के भीतर मुख्य ओपीडी ब्लॉक के प्रवेश द्वार (Main Entrance) के पास ही स्थापित कर दिया जाएगा। प्रशासन को उम्मीद है कि इस जनोपयोगी पहल से अस्पताल की व्यवस्थाएं सुधरेंगी और मरीजों का कीमती समय व पैसा दोनों बच सकेगा।

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