Connect with us

उत्तराखंड

भारत में बढ़ सकती है महंगाई, S&P ग्लोबल ने कमजोर मानसून को लेकर जारी की चिंताजनक रिपोर्ट

नई दिल्ली/देहरादून। वैश्विक रेटिंग एजेंसी एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स (S&P Global Ratings) ने सोमवार को भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर एक बेहद चिंताजनक रिपोर्ट जारी की है। एजेंसी के मुताबिक भारत में इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून के कमजोर रहने की आशंका है, जिसके कारण देश में महंगाई बढ़ सकती है। इस कमजोर मानसून का सीधा असर ग्रामीण मांग पर पड़ेगा, जिससे ग्रामीण बाजारों में सुस्ती आएगी और देश के राजकोषीय संतुलन पर भारी दबाव देखने को मिल सकता है।

रेटिंग एजेंसी ने अपनी ताजा रिपोर्ट में साफ किया है कि इस बार भारतीय कृषि क्षेत्र पर दोहरी मार पड़ने की पूरी आशंका बनी हुई है। एक तरफ जहां दक्षिण-पश्चिम मानसून के कमजोर रहने का अनुमान है, वहीं दूसरी तरफ वैश्विक स्तर पर चल रहे ईरान युद्ध के कारण लागत खर्च में भारी बढ़ोतरी हो रही है। इन दोनों कारणों के एक साथ आने से कृषि क्षेत्र की मुश्किलें काफी ज्यादा बढ़ सकती हैं।

यह भी पढ़ें 👉  वैश्विक बाजार में कच्चा तेल हुआ $70 के पास, फिर भारत में क्यों नहीं घट रहे पेट्रोल-डीजल के दाम?

एसएंडपी के अनुसार, देश में कम बारिश होने की वजह से कृषि उपज यानी फसलों के उत्पादन में सीधे तौर पर कमी आने की आशंका है। फसलों की कम पैदावार होने से किसानों की आय में गिरावट दर्ज की जा सकती है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाती है।

इसके अलावा, मानसून की इस बेरुखी के कई अप्रत्यक्ष प्रभाव भी भारतीय बाजारों पर देखने को मिल सकते हैं, जिनमें खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतें सबसे प्रमुख हैं। खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ने से आम उपभोक्ताओं की जेब पर सीधा असर पड़ेगा। रिपोर्ट के मुताबिक, यदि बारिश में बड़ी कमी आती है तो केंद्र और राज्य दोनों ही सरकारों को व्यापक स्तर पर सहायता उपाय प्रदान करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।

यह भी पढ़ें 👉  उत्तराखंड में कल से शुरू होगा 15 दिवसीय महा-अभियान; घर बैठे होगा समस्याओं का समाधान

सरकारों द्वारा दिए जाने वाले ये राहत पैकेज देश की राजकोषीय सुदृढ़ीकरण की योजनाओं को पूरी तरह पटरी से उतार सकते हैं। इसके साथ ही कमजोर मानसून के कारण देश में पनबिजली (हाइड्रोपावर) उत्पादन में भी 10 से 15 फीसदी तक की बड़ी कमी आ सकती है, जिससे बिजली संकट का खतरा भी पैदा हो सकता है।

रेटिंग एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में विशेष रूप से रेखांकित किया है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में आने वाली गिरावट के प्रति देश का कृषि रसायन क्षेत्र, ट्रैक्टर निर्माता और दोपहिया वाहन निर्माता कंपनियां काफी ज्यादा संवेदनशील हैं। कृषि क्षेत्र पर पड़ने वाले इन नकारात्मक प्रभावों के कारण बैंकिंग क्षेत्र के लिए भी ऋण वृद्धि काफी धीमी हो जाएगी और बैंकों की संपत्ति की गुणवत्ता में मामूली गिरावट आने के आसार हैं।

Ad Ad Ad
Continue Reading
You may also like...

More in उत्तराखंड

Ad Ad Ad

Trending News

Follow Facebook Page