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उत्तराखंड

धार्मिक स्थलों की मर्यादा बनाम बयानबाज़ी: अरशद मदनी की टिप्पणी पर संत समाज का तीखा प्रतिरोध

उत्तराखंड के धार्मिक स्थलों पर “गैर हिंदु प्रवेश निषेध” मामले ने अब सियासी और वैचारिक बहस का रुप ले लिया है। दरअसल, जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष अरशद मदनी की इस मुद्दे पर की गई टिप्पणी के बाद संत समाज में भारी रोष देखने को मिल रहा है। श्री पंचायत बड़ा उदासीन अखाड़े के संत सूर्यांश मुनि ने मदनी के बयान को सनातन परंपराओं और धार्मिक आस्थाओं के विरुद्ध बताते हुए कहा कि देवभूमि के तीर्थों की अपनी मर्यादा, शुद्धता और नियम हैं, जिनका पालन हर आगंतुक के लिए अनिवार्य होना चाहिए।

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श्री पंचायत बड़ा उदासीन अखाड़े के संत सूर्यांश मुनि ने कहा कि चूंकि देश के प्रत्येक धार्मिक स्थल की अलग पहचान और परंपरा होती है, जैसे अन्य धर्मों के स्थलों पर उनके नियम लागू होते हैं, ठीक वैसे ही हिंदू तीर्थों में भी सनातन परंपराओं का सम्मान जरूरी है। सूर्यांश मुनि ने आरोप लगाया कि कुछ असामाजिक तत्व तीर्थ क्षेत्रों में आकर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाते हैं और पवित्रता भंग करते हैं। संतों ने राज्य सरकार से मांग की है कि तीर्थों की गरिमा और श्रद्धालुओं की आस्था की रक्षा के लिए स्पष्ट और सख्त नीति बनाई जाए। साथ ही चेतावनी दी कि यदि जनभावनाओं की अनदेखी हुई तो संत समाज आंदोलन का रास्ता अपनाने से पीछे नहीं हटेगा।

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