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उत्तराखंड

उत्तराखंड जनगणना 2027: राजधानी में डिजिटल जनगणना की करसत शुरु, ऐसे होगी पूरी जनगणना

उत्तराखंड में इस बार डिजीटल माध्यम से जनगणना होने जा रही है, जिसके लिए राजधानी देहरादून जिला प्रशासन ने तैयारियों की गति बढ़ा दी है। इसके तहत बुधवार से शुक्रवार 27 फरवरी तक आइआरडीटी सभागार सर्वे चौक में शुरू हुए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में जनगणना से जुड़े सभी स्तरों के अधिकारी व कार्मिक डिजिटल सर्वे प्रणाली की बारीकियां बताई जा रही हैं। जानकारी के अनुसार, इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान पहले दिन प्रतिभागियों को सीएमएमएस पोर्टल और क्रिएटर ऐप के माध्यम से हाउस-लिस्टिंग ब्लाक निर्माण, सीमांकन सत्यापन और डिजिटल एंट्री के रियल-टाइम प्रोसेस से परिचित कराया गया।

विशेषज्ञों ने व्यवहारिक सत्रों के माध्यम से यह भी दिखाया कि किस प्रकार हर ब्लाक की जियो-लोकेशन निर्धारित की जाएगी और डेटा की गोपनीयता को उच्च स्तर पर सुरक्षित रखा जाएगा। वहीं चार्ज अधिकारी, सहायक अधिकारी, तकनीकी सहायक और सेंसस क्लर्कों को मोबाइल एप आधारित डेटा संकलन, वेब-मैपिंग, जियो-टैगिंग, सीमांकन और डेटा सुरक्षा से जुड़ा व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। इसके अतिरिक्त अधिकारियों को यह भी जानकारी दी गई कि इस बार जनगणना कार्य पूर्णत: मोबाइल एप के माध्यम से किया जाएगा।

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दो चरणों में नई सुविधा से होगी स्व-गणना

डिजिटल जनगणना दो चरणों में होगी। पहला चरण 25 अप्रैल से 24 मई 2026 तक चलेगा, जिसमें घरों और मकानों का विवरण एकत्र किया जाएगा। दूसरा चरण 9 से 28 फरवरी 2027 तक होगा, जिसमें लोगों की गिनती होगी। बर्फीले इलाकों के लिए 11 से 30 सितंबर 2026 का अलग समय रखा गया है। इस बार 10 से 24 अप्रैल तक लोग खुद वेबसाइट पर अपनी जानकारी भर सकेंगे। प्रशिक्षण में जिला जनगणना अधिकारी केके मिश्रा, अपर्णा ढौंडियाल, तान्या सेठ, प्रदीप यादव और कुलदीप चौहान जैसे अधिकारी शामिल हुए।

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आपको बता दें कि इस डिजिटल जनगणना के तहत प्रगणक और पर्यवेक्षक घर-घर जाकर अपने मोबाइल के माध्यम से जानकारी दर्ज करेंगे और संपूर्ण कार्य जनगणना प्रबंधन एवं निगरानी प्रणाली के माध्यम से मानिटर किया जाएगा। वहीं अपर जिलाधिकारी केके मिश्रा ने प्रशिक्षु अधिकारियों को ज्ञात कराया कि डिजिटल जनगणना भविष्य में प्रशासनिक योजना की आधारशिला है, लिहाजा लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं है।

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