उत्तराखंड
चकराता ऑडियो विवाद: पीड़िता दीक्षा ने एसएसपी से की मुलाकात, कांग्रेस पर बोला तीखा हमला
उत्तराखंड की राजनीति में चकराता से कांग्रेस विधायक प्रीतम सिंह और उनके परिजनों से जुड़ा कथित वायरल ऑडियो प्रकरण लगातार गरमाता जा रहा है। इस संवेदनशील मामले में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के हस्तक्षेप के बाद स्थिति में बड़ा मोड़ आया है। बीते शनिवार को मुख्यमंत्री धामी ने पीड़ित बालिका दीक्षा से सीधे फोन पर बात कर उसे पूर्ण सुरक्षा और न्याय का ठोस आश्वासन दिया। मुख्यमंत्री के इस भरोसे के बाद पीड़ित परिवार के हौसले बुलंद हुए हैं और उन्होंने पुलिस प्रशासन का दरवाजा खटखटाया है।
मुख्यमंत्री से बातचीत के बाद पीड़ित बालिका दीक्षा और उसके परिजनों ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) देहरादून से मुलाकात की। एसएसपी कार्यालय में पीड़िता ने आरोपियों के खिलाफ तत्काल और सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग उठाई। पुलिस अधिकारियों ने भी मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए निष्पक्ष जांच और परिवार को पूर्ण सुरक्षा मुहैया कराने का लिखित व मौखिक आश्वासन दिया है।
मीडिया से बातचीत के दौरान पीड़ित बालिका दीक्षा ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का आभार जताने के साथ ही कांग्रेस पार्टी पर तीखे राजनीतिक हमले किए। दीक्षा ने प्रदेश में निकाली जा रही कांग्रेस की ‘न्याय यात्रा’ की मंशा पर सवाल खड़े किए। उसने कहा कि एक तरफ कांग्रेस पार्टी प्रदेश में महिलाओं के अधिकारों के लिए सड़क पर उतरकर न्याय यात्रा निकाल रही है, वहीं दूसरी तरफ उसी पार्टी के विधायक के परिजन इलाके में बेटियों को डराने-धमकाने का काम कर रहे हैं।
दीक्षा ने कांग्रेस की इस न्याय यात्रा को ‘हाथी के दिखाने वाले दांत’ करार दिया। उसने आरोप लगाया कि पार्टी की कथनी और करनी में जमीन-आसमान का अंतर है। पीड़िता ने कहा कि जब विधायक के अपने ही क्षेत्र में बेटियां सुरक्षित महसूस नहीं कर रही हैं, तो ऐसी यात्रा का कोई नैतिक औचित्य नहीं रह जाता। स्थानीय जनता और क्षेत्रवासियों के समर्थन का धन्यवाद करते हुए उसने कहा कि समाज के साथ खड़े होने से दबंगों के हौसले पस्त हुए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह पूरा घटनाक्रम कांग्रेस पार्टी के लिए एक बड़ा झटका साबित हो रहा है। राज्य सरकार को बैकफुट पर धकेलने के इरादे से चलाई जा रही ‘न्याय यात्रा’ के बीच अपने ही वरिष्ठ विधायक के परिवार पर लगे इन गंभीर आरोपों ने पार्टी को असहज स्थिति में डाल दिया है। मुख्यमंत्री धामी के त्वरित एक्शन ने सरकार के प्रति जनता के विश्वास को और मजबूत किया है।
प्रशासनिक स्तर पर भी अब हलचल तेज हो गई है। वायरल ऑडियो के सामने आने के बाद से ही पीड़ित परिवार लगातार धमकियों की शिकायत कर रहा था। हालांकि, अब शीर्ष नेतृत्व के हस्तक्षेप और पुलिस प्रशासन के सख्त रुख से साफ हो गया है कि कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वाले किसी भी दबंग को बख्शा नहीं जाएगा।



